मध्यप्रदेश में
कुलपति बने कुलाधिपति के गले की हड्डी
भोपाल। मध्यप्रदेश के रसूखदार और दबंग कुलपति डाॅ. कमलाकर सिंह के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कुछ दिन पहले ही जिस भोज मुक्त विश्वविद्यालय के भवन का लोकार्पण किया था, यह जांच उसी भवन से संबंधित है। भवन निर्माण में आर्थिक अनियमितताओं को लेकर कई शिकायतें हैं। जांच के घेरे में स्वयं विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. कमलाकर सिंह हैं। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने कुलपति के अलावा विवि के इंजीनियर, दो फर्म व एक ठेकेदार के खिलाफ प्रारंभिक जांच के लिए शिकायत दर्ज की है। गौरतलब है कि भोज विश्वविद्यालय के भवन निर्माण में लगभग 25 करोड़ खर्च हुआ है। शासन के विभिन्न विभागों से भवन निर्माण की अनुमति न लेने और निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरतने के आरोप विश्वविद्यालय के मुखिया डाॅ. कमलाकर सिंह पर लग रहे हैं। जबलपुर के अधिवक्ता कमलेश द्विवेदी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि ठेका देने सहित अनेक कार्य गैर जिम्मेदाराना तरीके से किया गया है। भवन निर्माण के लिए जिस एजेंसी का चयन किया गया उसे अपात्र कहा जा रहा है। यह भी आरोप लगा है कि इस एजेंसी के चयन में गलत ढ़ंग से प्रक्रिया अपनाई गई। अपनी शिकायत में अधिवक्ता कमलेश द्विवेदी ने विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. कमलाकर सिंह सहित, इंजीनियर पंकज राय, केन्द्र सरकार के उद्यम नेशनल विल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड दिल्ली (एनबीसीसी), ठेकेदार प्रकाश वाधवानी भोपाल, कार्नर प्वांट बड़ौदा तथा विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों के विरूद्ध मामला दजे करने की मांग की थी। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को दस्तावेज उपलब्ध कराने में आना-कानी की जा रही है, लेकिन छात्र संगठनों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की अगुवाई में अनियमिततओं के खिलाफ लामबंदी कर रखी है। भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. कमलाकर सिंह, कुलाधिपति डाॅ. बलराम जाखड़ की गले की हड्डी बन गए हैं। कमलाकर सिंह जब से कुलपति बने हैं, कोई न कोई विवाद उनके पीछे लगा ही है। इसके पूर्व वे बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल में कुलसचिव और यूजीसी के क्षेत्रीय कार्यालय में सदस्य सचिव रह चुके हैं। तब भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। डाॅ. कमलाकर सिंह के विरोधी, उनका नाम प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केन्द्र की यूपीए सरकार में मानव संसाधन मंत्री तथा कांग्रेस के कद्दावर नेता अर्जुन सिंह के कृपापात्र के रूप में लेते हैं। कमलाकर सिंह इसे गर्व के साथ लोगों को बताते हैं। लेकिन, यही मंुहबोलपन राज्यपाल बलराम जाखड़ और अर्जुन सिंह के गले की हड्डी बना हुआ। मध्यप्रदेश शासन के मुखिया शिवराज सिंह चैहान भी इस मुद्दे पर पशोपेश में हैं। हालांकि, कुलपति मामले में राज्य शासन से अधिक राज्यपाल की भूमिका है। लेकिन प्रदेश शासन के मुखिया के नाते लंबी चुप्पी उनके लिए भी घातक हो सकती है। गौरतलब है कि कुलपति के भ्रष्टाचार के खिलाफ एबीवीपी ने मुहिम चलाई हुई है। एबीवीपी के क्षेत्रीय संगठन मंत्री विष्णुदत्त शर्मा लंबे समय से डाॅ. कमलाकर सिंह की कारगुजारियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। राष्ट्रपति के भोपाल आगमन के दौरान उन्होंने एक दिवसीय महाउपवास और धरने का आयोजन किया। विद्यार्थी परिषद् के एक प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भी सौंपा। इस छात्र संगठन ने एक तरफ तो महामहिम का भोपाल में स्वागत किया, वहीं दूसरी ओर शिक्षा क्षेत्र मे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर मैदान और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन भी। परिषद् के वरिष्ठ नेता विष्णुदत्त शर्मा ने यह कहते हुए डाॅ. कमलाकर सिंह के राष्ट्रपति के साथ मंचासीन होने का विरोध किया कि क्या ऐसा व्यक्ति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के साथ मंचासीन होगा जिसने फजी तरीके से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। श्री शर्मा ने कहा, कमलाकर सिंह ने एक नहीं कई डिग्रियां गलत तरीके से अर्जित की हैं। वे उन्हीं गलत उपधियों के आधार पर कुलपति जैसे पद पर बैठे हैं। वे आज भी अनियमितताओं से बाज नहीं आ रहे हैं। भोज विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन का करोड़ों का निर्माण बिना निविदा के किया गया है। भवन-निर्माण का नक्शा भी स्वीकृत नहीं कराया गया है। विद्यार्थी परिषद् ने कुलाधिपति और प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी कटघरे में खड़ा किया। राष्ट्रपति के भोपाल प्रवास के दौरान आम जनता के लिए जारी एक पर्चे में परिषद् ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से कई तीखे सवाल किए। उनसे पूछा गया कि राष्ट्रपति को कमलाकर सिंह पर लगे आरेापों की जानकारी पूर्व में ही क्यों नहीं दी गई ? मध्यप्रदेश में शिक्षा से जुड़े कई लोगों पर छोटे आरोप लगने के बावजूद उन पर कार्यवाई कर दी गई, लेकिन दोषी पाए जाने के बावजूद कमलाकर सिंह पर अभी तक कार्यवाई क्यों नहंीं की गई ? मध्यप्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के सदस्य और पदाधिकारी रह चुके हैं। लेकिन, संगठन ने उन्हें भी बख्शा। मुख्यमंत्री से एबीवीपी ने पूछा है कि उनकी कथनी और करनी में अंतर क्यों है ? जिस व्यक्ति (डाॅ. कमलाकर सिंह) का विरोध संसद सदस्य रहते हुए किया, आज अधिकार मिलने पर वे उसके खिलाफ कार्यवाई क्यों नहीं कर रहे हैं ? कुलाधिपति और मुख्यमंत्री दोनों से परिषद् ने भ्रष्ट, उपाधि प्राप्त करने में नकल के आरोपी और अनैतिक व्यक्ति को संरक्षण न देने की मांग की है। वैसे तो परिषद् ने राष्ट्रपति को दिए ज्ञापन में मध्यप्रदेश की पूरी उच्च शिक्षा में ही भ्रष्टाचार और अनियमितता का कच्चा चिट्ठा रखा है, लेकिन कमलाकर सिंह और भोज विश्वविद्यालय का मामला अधिक संगीन है। वैसे तो कमलाकर सिंह भाजपा सरकार और संगठन में भी अपनी पहुंच का दावा करते हैं। संभव है उनके कुछ शुभचिंतक हों भी। लेकिन चुनाव के ऐन मौके पर कांग्रेस या भाजपा से कोई नेता उनकी तरफदारी करेगा यह तो मुश्किल ही है। उल्टे भजपा इसे भी एक मुद्दा बनाने की कोशिश करेगी। अब जबकि ईओडब्ल्यू की जांच शुरू हो गई है तो यह मामला और भी तूल पकड़ेगा। चर्चा सिर्फ कुलपति ही नहीं, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति तक की होगी।
भोपाल। मध्यप्रदेश के रसूखदार और दबंग कुलपति डाॅ. कमलाकर सिंह के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कुछ दिन पहले ही जिस भोज मुक्त विश्वविद्यालय के भवन का लोकार्पण किया था, यह जांच उसी भवन से संबंधित है। भवन निर्माण में आर्थिक अनियमितताओं को लेकर कई शिकायतें हैं। जांच के घेरे में स्वयं विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. कमलाकर सिंह हैं। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने कुलपति के अलावा विवि के इंजीनियर, दो फर्म व एक ठेकेदार के खिलाफ प्रारंभिक जांच के लिए शिकायत दर्ज की है। गौरतलब है कि भोज विश्वविद्यालय के भवन निर्माण में लगभग 25 करोड़ खर्च हुआ है। शासन के विभिन्न विभागों से भवन निर्माण की अनुमति न लेने और निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरतने के आरोप विश्वविद्यालय के मुखिया डाॅ. कमलाकर सिंह पर लग रहे हैं। जबलपुर के अधिवक्ता कमलेश द्विवेदी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि ठेका देने सहित अनेक कार्य गैर जिम्मेदाराना तरीके से किया गया है। भवन निर्माण के लिए जिस एजेंसी का चयन किया गया उसे अपात्र कहा जा रहा है। यह भी आरोप लगा है कि इस एजेंसी के चयन में गलत ढ़ंग से प्रक्रिया अपनाई गई। अपनी शिकायत में अधिवक्ता कमलेश द्विवेदी ने विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. कमलाकर सिंह सहित, इंजीनियर पंकज राय, केन्द्र सरकार के उद्यम नेशनल विल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड दिल्ली (एनबीसीसी), ठेकेदार प्रकाश वाधवानी भोपाल, कार्नर प्वांट बड़ौदा तथा विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों के विरूद्ध मामला दजे करने की मांग की थी। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को दस्तावेज उपलब्ध कराने में आना-कानी की जा रही है, लेकिन छात्र संगठनों ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की अगुवाई में अनियमिततओं के खिलाफ लामबंदी कर रखी है। भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. कमलाकर सिंह, कुलाधिपति डाॅ. बलराम जाखड़ की गले की हड्डी बन गए हैं। कमलाकर सिंह जब से कुलपति बने हैं, कोई न कोई विवाद उनके पीछे लगा ही है। इसके पूर्व वे बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल में कुलसचिव और यूजीसी के क्षेत्रीय कार्यालय में सदस्य सचिव रह चुके हैं। तब भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। डाॅ. कमलाकर सिंह के विरोधी, उनका नाम प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केन्द्र की यूपीए सरकार में मानव संसाधन मंत्री तथा कांग्रेस के कद्दावर नेता अर्जुन सिंह के कृपापात्र के रूप में लेते हैं। कमलाकर सिंह इसे गर्व के साथ लोगों को बताते हैं। लेकिन, यही मंुहबोलपन राज्यपाल बलराम जाखड़ और अर्जुन सिंह के गले की हड्डी बना हुआ। मध्यप्रदेश शासन के मुखिया शिवराज सिंह चैहान भी इस मुद्दे पर पशोपेश में हैं। हालांकि, कुलपति मामले में राज्य शासन से अधिक राज्यपाल की भूमिका है। लेकिन प्रदेश शासन के मुखिया के नाते लंबी चुप्पी उनके लिए भी घातक हो सकती है। गौरतलब है कि कुलपति के भ्रष्टाचार के खिलाफ एबीवीपी ने मुहिम चलाई हुई है। एबीवीपी के क्षेत्रीय संगठन मंत्री विष्णुदत्त शर्मा लंबे समय से डाॅ. कमलाकर सिंह की कारगुजारियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। राष्ट्रपति के भोपाल आगमन के दौरान उन्होंने एक दिवसीय महाउपवास और धरने का आयोजन किया। विद्यार्थी परिषद् के एक प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भी सौंपा। इस छात्र संगठन ने एक तरफ तो महामहिम का भोपाल में स्वागत किया, वहीं दूसरी ओर शिक्षा क्षेत्र मे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर मैदान और सड़कों पर विरोध प्रदर्शन भी। परिषद् के वरिष्ठ नेता विष्णुदत्त शर्मा ने यह कहते हुए डाॅ. कमलाकर सिंह के राष्ट्रपति के साथ मंचासीन होने का विरोध किया कि क्या ऐसा व्यक्ति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के साथ मंचासीन होगा जिसने फजी तरीके से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। श्री शर्मा ने कहा, कमलाकर सिंह ने एक नहीं कई डिग्रियां गलत तरीके से अर्जित की हैं। वे उन्हीं गलत उपधियों के आधार पर कुलपति जैसे पद पर बैठे हैं। वे आज भी अनियमितताओं से बाज नहीं आ रहे हैं। भोज विश्वविद्यालय के नवनिर्मित भवन का करोड़ों का निर्माण बिना निविदा के किया गया है। भवन-निर्माण का नक्शा भी स्वीकृत नहीं कराया गया है। विद्यार्थी परिषद् ने कुलाधिपति और प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी कटघरे में खड़ा किया। राष्ट्रपति के भोपाल प्रवास के दौरान आम जनता के लिए जारी एक पर्चे में परिषद् ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से कई तीखे सवाल किए। उनसे पूछा गया कि राष्ट्रपति को कमलाकर सिंह पर लगे आरेापों की जानकारी पूर्व में ही क्यों नहीं दी गई ? मध्यप्रदेश में शिक्षा से जुड़े कई लोगों पर छोटे आरोप लगने के बावजूद उन पर कार्यवाई कर दी गई, लेकिन दोषी पाए जाने के बावजूद कमलाकर सिंह पर अभी तक कार्यवाई क्यों नहंीं की गई ? मध्यप्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के सदस्य और पदाधिकारी रह चुके हैं। लेकिन, संगठन ने उन्हें भी बख्शा। मुख्यमंत्री से एबीवीपी ने पूछा है कि उनकी कथनी और करनी में अंतर क्यों है ? जिस व्यक्ति (डाॅ. कमलाकर सिंह) का विरोध संसद सदस्य रहते हुए किया, आज अधिकार मिलने पर वे उसके खिलाफ कार्यवाई क्यों नहीं कर रहे हैं ? कुलाधिपति और मुख्यमंत्री दोनों से परिषद् ने भ्रष्ट, उपाधि प्राप्त करने में नकल के आरोपी और अनैतिक व्यक्ति को संरक्षण न देने की मांग की है। वैसे तो परिषद् ने राष्ट्रपति को दिए ज्ञापन में मध्यप्रदेश की पूरी उच्च शिक्षा में ही भ्रष्टाचार और अनियमितता का कच्चा चिट्ठा रखा है, लेकिन कमलाकर सिंह और भोज विश्वविद्यालय का मामला अधिक संगीन है। वैसे तो कमलाकर सिंह भाजपा सरकार और संगठन में भी अपनी पहुंच का दावा करते हैं। संभव है उनके कुछ शुभचिंतक हों भी। लेकिन चुनाव के ऐन मौके पर कांग्रेस या भाजपा से कोई नेता उनकी तरफदारी करेगा यह तो मुश्किल ही है। उल्टे भजपा इसे भी एक मुद्दा बनाने की कोशिश करेगी। अब जबकि ईओडब्ल्यू की जांच शुरू हो गई है तो यह मामला और भी तूल पकड़ेगा। चर्चा सिर्फ कुलपति ही नहीं, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति तक की होगी।