कांग्रेस के महासचिव और राजीव-सोनिया पुत्र राहुल गांधी के मध्यपदेश आगमन और यहां के कुछेक विश्वविद्यालय परिसरों में उनके कार्यक्रमों से बवाल मचा है। यह विवाद भाजपा या अन्य के लिए अनपेक्षित हो सकता है, लेकिन राहुल गांधी के योजनाकारों के लिए यह अपेक्षित और उनकी योजना का परिणाम ही है। भाजपा के नेताओं और भाजपा सरकार के प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी की यात्रा के बाद जो बयान, कायवाई या पहल की उसका सीधा या प्रकारान्तर से प्रचारात्मक लाभ राहुल गांधी को ही मिला।
यह पहली बार नहीं हुआ है कोई राजनीतिक व्यक्ति शैक्षणिक परिसर में गया हो। राहुल गांधी के पहले भी मंत्री, विधायक, सांसद, जनप्रतिनिधि और आकादमिक व्यक्ति का रूप धारण कर राजनैतिक लोग शिक्षा परिसरों में जाते रहे हैं। जाना भी चाहिए। अगर 18 साल से अधिक उम्र के युवाओं को मतदान का संवैधानिक अधिकार दिया गया है, काॅलेज और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ के चुनाव हो रहे हैं, वहां विभिन्न स्तरों पद राजनीति शास्त्र का अध्ययन-अध्यापन हो रहा है तो कोई कारण नहीं कि शैक्षणिक परिसरों को राजनेताओं से अछूत रखा जाए। काॅलेज-विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं का राजनीतिक प्रशिक्षण हो यह देश की राजनीति के लिए शुभ भी है और लाभकारी भी। राजनेताओं का विश्वविद्यालय परिसरों में जाना और विद्याथियों से संवाद करना उपयुक्त भी है और आवश्यक भी। हां! इस दृष्टि से इतना अवश्य होना चाहिए कि इस संवाद हेतु कोइ नीति और पद्धति भी विकसित हो। भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को भी योजनापूर्वक यह प्रयास करना चाहिए कि वे भी छात्र-छात्राओं के बीच अपना विचार, संगठन और नीति लेकर जाएं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने छात्र राजनीति के मामले में एक नजीर पेश की है। वहां से राजनीतिक प्रशिक्षण प्राप्त छात्रों ने देश की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है।
राहुल गांधी के प्रकरण में भाजपा ने प्रतिक्रिया की है। इस प्रतिक्रिया से कांग्रेस और उनके नेताओं का प्रचार ही होगा। इस दिशा में भाजपा नेता, उनके युवा नेतृत्व अगर पिछलग्गू और प्रतिक्रिया व्यक्त करने की बजाए छात्र और युवा राजनीति के लिए योजनाबद्ध नेतृत्व प्रदान करें तो यह देश और प्रदेश की राजनीति के हित में ही होगा।
शनिवार, 23 जनवरी 2010
प्रति,
महोदय,
आप विश्व संवाद केन्द्र से परिचित ही हैं। आपको विदित ही है कि केन्द्र मीडिया के क्षेत्र में शोध, जागरुकता, जनसंपर्क और संचार संबंधी कार्यो में गत कई वर्षों से कार्यरत है। विश्व संवाद केन्द्र विभिन्न विषयों पर विशेषांक, स्मारिका, पुस्तिकाएं और पुस्तकों का प्रकाशन भी करता रहा है। आपको स्मरण कराते हुए प्रसन्नता होती है कि विश्व संवाद केन्द्र ने गत 10 वर्षों में संवाद मंथन, साप्ताहिक लेख सेवा के अतिरिक्त - स्वतंत्रता के इक्शवन वर्ष: क्या खोया, क्या पाया, कश्मीर: कबिलाई आक्रमण से करगिल तक, जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन, भाई परमानन्द व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व, उत्सव मेरे प्राण जैसे विशेषांक और पुस्तिकाओं का प्रकाशन किया है। अभी हाल में ही ‘‘तुष्टीकरण’’ विषय पद विशेषांक का प्रकाशन किया गया है। इसके लेख और अन्य सामग्रियों पर काफी चर्चा हुई।
विश्व संवाद केन्द्र द्वारा पूर्व की ही भांति अपने नए विशेषांक/स्मारिका के प्रकाशन की योजना बनी है। इस बार ‘‘मध्यप्रदेश में आंतरिक सुरक्षा’’ विषय पद विशेषांक का प्रकाशन किया जा रहा है। हमारा प्रयास आपके सहयोग के बिना तो पूरा हो सकता है और न ही प्रभावी। कृपया हमारे इस प्रयास में आप भी मदद करने का कष्ट करें। निम्न विषयों से संबंधित आलेख, जानकारी के साथ आंकड़े और दस्तावेज/अभिलेख आपके पास उपलब्ध हों तो कृपया हमें उपलब्ध कराने का कष्ट करें-
1. आंतरिक सुरक्षा के मायने
2. मध्यप्रदेश में आंतरिक सुरक्षा से संबंधित प्रमुख विषय/मुदृदे
3. प्रदेश के नागरिकों में आंतरिक सुरक्षा बोध
4. आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में व्यक्ति, समाज और सरकार की भूमिका
5. आंतरिक सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार की पहल
6. प्रदेश के लिए आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से प्रमुख खतरे
7. आंतरिक सुरक्षा: मध्यप्रदेश की चुनौतियां
8. मध्यप्रदेश में आंतरिक सुरक्षा
9. घुसपैठ, आतंकवाद, नक्सलवाद, मतान्मरण और आंतरिक सुरक्षा
10. मध्य्रपेदश का सांस्कृतिक ताना-बाना और आंतरिक सुरक्षा
11. अल्पसंख्यक दृष्टि से मध्यप्रदेश की आंतरिक सुरक्षा
12. चर्च, मदरसे, मिशनरियों और पादरियों की सक्रियता और आंतरिक सुरक्षा
13. आंतरिक सुरक्षा: केन्द्र और प्रदेश
14. आंतरिक सुरक्षा: रीति-नीति, कानून और क्रियान्वयन
15. आंतरिक सुरक्षा में नागरिक संगठनों की भूमिका
16. मध्यप्रदेश में विभिन्न आंदोलन और आंतरिक सुरक्षा
17. देश की सुरक्षा और मध्यप्रदेश की आंतरिक सुरक्षा
18. आंतरिक सुरक्षा: क्या करें, क्या न करें
19. संबंधित पुस्तकें
20. दुनिया में आंतरिक सुरक्षा
21. देश में आंतरिक सुरक्षा
22. मध्यपदेश में आंतरिक सुरक्षा
अन्य विषय जो आपको समीचीन, संदर्भित और उपयोगी लगते हों। विश्व संवाद केन्द्र इस सहयोग के लिए आपके प्रति ऋणी होगा। आपके सहयोग और मार्गदर्शन की प्रतीक्षा में।
सादर,
भवदीय
अनिल सौमित्र
संपादक
महोदय,
आप विश्व संवाद केन्द्र से परिचित ही हैं। आपको विदित ही है कि केन्द्र मीडिया के क्षेत्र में शोध, जागरुकता, जनसंपर्क और संचार संबंधी कार्यो में गत कई वर्षों से कार्यरत है। विश्व संवाद केन्द्र विभिन्न विषयों पर विशेषांक, स्मारिका, पुस्तिकाएं और पुस्तकों का प्रकाशन भी करता रहा है। आपको स्मरण कराते हुए प्रसन्नता होती है कि विश्व संवाद केन्द्र ने गत 10 वर्षों में संवाद मंथन, साप्ताहिक लेख सेवा के अतिरिक्त - स्वतंत्रता के इक्शवन वर्ष: क्या खोया, क्या पाया, कश्मीर: कबिलाई आक्रमण से करगिल तक, जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन, भाई परमानन्द व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व, उत्सव मेरे प्राण जैसे विशेषांक और पुस्तिकाओं का प्रकाशन किया है। अभी हाल में ही ‘‘तुष्टीकरण’’ विषय पद विशेषांक का प्रकाशन किया गया है। इसके लेख और अन्य सामग्रियों पर काफी चर्चा हुई।
विश्व संवाद केन्द्र द्वारा पूर्व की ही भांति अपने नए विशेषांक/स्मारिका के प्रकाशन की योजना बनी है। इस बार ‘‘मध्यप्रदेश में आंतरिक सुरक्षा’’ विषय पद विशेषांक का प्रकाशन किया जा रहा है। हमारा प्रयास आपके सहयोग के बिना तो पूरा हो सकता है और न ही प्रभावी। कृपया हमारे इस प्रयास में आप भी मदद करने का कष्ट करें। निम्न विषयों से संबंधित आलेख, जानकारी के साथ आंकड़े और दस्तावेज/अभिलेख आपके पास उपलब्ध हों तो कृपया हमें उपलब्ध कराने का कष्ट करें-
1. आंतरिक सुरक्षा के मायने
2. मध्यप्रदेश में आंतरिक सुरक्षा से संबंधित प्रमुख विषय/मुदृदे
3. प्रदेश के नागरिकों में आंतरिक सुरक्षा बोध
4. आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में व्यक्ति, समाज और सरकार की भूमिका
5. आंतरिक सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार की पहल
6. प्रदेश के लिए आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से प्रमुख खतरे
7. आंतरिक सुरक्षा: मध्यप्रदेश की चुनौतियां
8. मध्यप्रदेश में आंतरिक सुरक्षा
9. घुसपैठ, आतंकवाद, नक्सलवाद, मतान्मरण और आंतरिक सुरक्षा
10. मध्य्रपेदश का सांस्कृतिक ताना-बाना और आंतरिक सुरक्षा
11. अल्पसंख्यक दृष्टि से मध्यप्रदेश की आंतरिक सुरक्षा
12. चर्च, मदरसे, मिशनरियों और पादरियों की सक्रियता और आंतरिक सुरक्षा
13. आंतरिक सुरक्षा: केन्द्र और प्रदेश
14. आंतरिक सुरक्षा: रीति-नीति, कानून और क्रियान्वयन
15. आंतरिक सुरक्षा में नागरिक संगठनों की भूमिका
16. मध्यप्रदेश में विभिन्न आंदोलन और आंतरिक सुरक्षा
17. देश की सुरक्षा और मध्यप्रदेश की आंतरिक सुरक्षा
18. आंतरिक सुरक्षा: क्या करें, क्या न करें
19. संबंधित पुस्तकें
20. दुनिया में आंतरिक सुरक्षा
21. देश में आंतरिक सुरक्षा
22. मध्यपदेश में आंतरिक सुरक्षा
अन्य विषय जो आपको समीचीन, संदर्भित और उपयोगी लगते हों। विश्व संवाद केन्द्र इस सहयोग के लिए आपके प्रति ऋणी होगा। आपके सहयोग और मार्गदर्शन की प्रतीक्षा में।
सादर,
भवदीय
अनिल सौमित्र
संपादक
गुरुवार, 21 जनवरी 2010
प्रो. बी.के. कुठियाला बने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति

bk प्रो. बी.के. कुठियाला बने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपतिभोपाल। प्रो. बी. के. कुठियाला माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नए कुलपति बने हैं। वे विश्वविद्यालय के सातवें कुलपति हैं। इसके पूर्व श्री अच्युतानन्द मिश्र और संस्थापक कुलपति डॉ. राधेश्याम शर्मा ऐसे कुलपति रहे जो अकादमिक पृष्ठभूमि के हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. शर्मा के बाद और श्री मिश्र के पूर्व जिन चार लोगों ने कुलपति का दायित्व निर्वहन किया वे प्रशासनिक पृष्ठभूमि के थे। इनमें डॉ. भागीरथ प्रसाद, श्री शरदचन्द्र बेहार और श्री सुमित बोस तो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे, जबकि श्री अरविन्द चतुर्वेदी राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रहे। श्री चतुर्वेदी जनसंपर्क विभाग में अपर संचालक के पद पर थे।
प्रो. ब्रजकिशोर कुठियाला कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष रहे हैं। वे भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के निदेशक भी रह चुके हैं। विश्वविद्याल अनुदान आयोग से संबध्द रहे श्री कुठियाला मीडिया, जनसंचार, शोध और शिक्षण कार्यों से जुड़े रहे हैं। मानवशास्त्र और समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त प्रो. कुठियाला अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। वे श्री अच्युतानन्द मिश्र के उतराधिकारी के रूप में विश्वविद्यालय की अकादमिक परंपरा का निर्वहन करेंगे। कार्यभार ग्रहण करते हुए प्रो. कुठियाला ने कहा कि वे विश्वविद्यालय की अकादमिक परंपरा का निर्वहन करते हुए कोशिश करेंगे कि वर्तमान संदर्भ में मीडिया की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंचार के क्षेत्र में कार्य करने वाले मूल्यनिष्ठ और राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण हो।
सोमवार, 11 जनवरी 2010
आने वाले दिनों में कुछ महत्वपूर्ण कार्यक्रम आप भी प्रतिभागी हो सकते हैं, हिस्सेदारी कर सकते हैं
1. 14 जनवरी, 2010 9ः30 बजे से पानी, पर्यावरण और पत्रकारिता पद माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला । यह कार्यक्रम हिन्दी वाटर पोर्टल के संयुक्त प्रयासों से हो रहा है।
2. 15, 16 और 17 जनवरी, 2010 को गढ़ी, टिमरनी में भाउ साहब भुस्कुटे स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन। इस आयोजन में 15 जनवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विश्व विभाग के सह-संयोजक श्री रवि कुमार अय्यर, ‘‘भारत महाशक्ति एवं विश्वगुरु बनने की ओर’’ विषय पद व्याख्यान देंगे। 16 और 17 जनवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निवर्तमान सरसंघचालक श्री कृप्.सी. सुदर्शन का व्याख्यान होगा। श्री सुदर्शन ‘‘पाश्चात्य चिन्तन और विकास पथ’’ और ‘‘हिन्दू चिन्तन और विकास पथ’’ विषय पद व्याख्यान देंगे।
3. 28 फरवरी, 2010 को भोपाल में विशाल हिन्दू संगम का आयोजन किया गया है। इस हिन्दू संगम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डाॅ. मोहनराव भागवत संबोधित करेंगे। संघ के कार्यकर्ताओं ने एक लाख परिवारों को पंजीयन कर उन्हें इस संगम में भागीदार बनाने का लक्ष्य रखा है।
4. 9 और 10 मार्च, 2010 को हरिद्वार में ‘‘राष्ट्र रक्षा सम्मेलन’’ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में देशभर के सुरक्षा विशेषज्ञों, सुरक्षा विषय पद शोध, अन्वेषण, दस्तावेजीकरण और लेखन करने वालों का आमंत्रित किया जा रहा है। सेना, अर्द्धसेनिक बल, और पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी भी इसमें बड़ी संख्या में भाग लेने वाले हैं।
2. 15, 16 और 17 जनवरी, 2010 को गढ़ी, टिमरनी में भाउ साहब भुस्कुटे स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन। इस आयोजन में 15 जनवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विश्व विभाग के सह-संयोजक श्री रवि कुमार अय्यर, ‘‘भारत महाशक्ति एवं विश्वगुरु बनने की ओर’’ विषय पद व्याख्यान देंगे। 16 और 17 जनवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निवर्तमान सरसंघचालक श्री कृप्.सी. सुदर्शन का व्याख्यान होगा। श्री सुदर्शन ‘‘पाश्चात्य चिन्तन और विकास पथ’’ और ‘‘हिन्दू चिन्तन और विकास पथ’’ विषय पद व्याख्यान देंगे।
3. 28 फरवरी, 2010 को भोपाल में विशाल हिन्दू संगम का आयोजन किया गया है। इस हिन्दू संगम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डाॅ. मोहनराव भागवत संबोधित करेंगे। संघ के कार्यकर्ताओं ने एक लाख परिवारों को पंजीयन कर उन्हें इस संगम में भागीदार बनाने का लक्ष्य रखा है।
4. 9 और 10 मार्च, 2010 को हरिद्वार में ‘‘राष्ट्र रक्षा सम्मेलन’’ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में देशभर के सुरक्षा विशेषज्ञों, सुरक्षा विषय पद शोध, अन्वेषण, दस्तावेजीकरण और लेखन करने वालों का आमंत्रित किया जा रहा है। सेना, अर्द्धसेनिक बल, और पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी भी इसमें बड़ी संख्या में भाग लेने वाले हैं।
शुक्रवार, 8 जनवरी 2010
विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा अपने अंतिम चरण में गोविन्दाचार्य ने हरदा, खंडवा और बुरहानपुर में यात्रा को संबोधित किया
यात्रा से अनिल सौमित्र
भोपाल। विश्व मंगल गौ-ग्राम यात्रा अब अब अंतिक चरण में है। पिछले साल विजयादशमी के दिन कुरूक्षेत्र से शुरू हुई यह यात्रा 17 जनवरी, 2010 को नागपुर में पूरी होगी। इस दौरान यह यात्रा 20 हजार किमी की देरी तय करेगी। 108 दिनों की इस यात्रा में 400 से अधिक धर्मसभाएं आयोजित होंगी। गौ को राष्ट्रीय प्राणी घोषित कराने के लिए करोड़ों हस्ताक्षर कराए जायेंगे। पूरे देशभर में जिला, तहसील और विकास खंडों में 15000 उप-यात्राएं के माध्यम से 10 लाख किमी की दूरी तय की जायेगी। इस बीच करोड़ों लोगों से संपर्क किया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि यात्रा अपने प्रथम चरण में 14 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के ग्वालियर से होकर निकली। इसी दिन मध्यभारत प्रांत में यात्रा का शुभारंभ भी हुआ। अब जबकि यात्रा अपने अंतिम दौर में है पुनः 02 जनवरी, 2010 को रतलाम में आई। 09 जनवरी को यह यात्रा जबलपुर से होकर छत्तीसगढ़ की सीमा में पहुचेगी। 10 जनवरी को कवर्धा में यात्रा का स्वागत होगा।
भोपाल में यह यात्रा 6 जनवरी को आई। इसके पूर्व 5 जनवरी को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के उप-नगर बैरसिया और बैरागढ़ में भी यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। भोपाल की सभा को गोकर्णपीठ श्रीरामचन्द्रपुर मठ के शंकराचार्य पूज्य श्री राघवेश्वर भारती महास्वामी जी और प्रख्यात चिन्तक श्री गोविन्दाचार्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा प्रमुख सीताराम जी के अलावा अनेक संतों और बुद्धिजीवियों ने संबोधित किया।
भोपाल की सभा को संबोधित करते हुए पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा कि गो-माता विश्व पावनी, जननी और पोषिणी हैं। लेकिन यह दुःख का विषय है कि गो-माता की रक्षा के लिए यात्रा निकालने की नौबत आ गई है। आज का समय ऐसा आ गया है कि हम गोपाल बनने में सम्मान नहीं बल्कि अपमान महसूस करते हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर की कि इस यात्रा के कारण लोगों में जागरुका आ रही है। गो रक्षा और इसके संवर्द्धन के लिए संगठन भी खड़ा हो रहा है। शंकराचार्य जी विश्व मंगल गौ-ग्राम यात्रा के उद्देश्यों पद प्रकाश डालते हुए कहा कि यह यात्रा व्यक्ति और समाज में परिवर्तन के लिए है। इसके माध्यम से कुछ ऐसा करना है ताकि देश की आने वाली पीढ़ियां खुशहाल रह सकें। हम इसके माध्यम से सरकार और समाज का ध्यान आकृष्ट कराना चाहते हैं। आज गौ माता की ऐसी दुर्दशा है इसीलिए यह यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने बताया कि गाय की उपेक्षा का एक बढ़ा कारण यह है कि हमें गाय का महत्व और उसका उपयोग ठीक से मालूम नहीं है। हमें गाय के बारे में आर्थिक और भावनात्मक दोनों पक्षों का उजागर करना है। गौ पालन के लिए भाव और इच्छा जागरण के साथ ही वातावरण निर्माण का कार्य भी करना आवश्यक है। इसके लिए हम सभी की सेवा चाहिए। श्री शंकराचार्य जी ने बताया कि यात्रा के बाद गौ-संरक्षण व संवर्द्धन के लिए विस्तृ त कार्य-योजना तैयार की जायेगी। स्थान-स्थान पद प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित करने की भी आवश्यकता है।
प्रख्यात चिंतक गोविन्दाचार्य ने स्वदेशी अर्थचिंतक श्री गोविंदाचार्य ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गौ माता जगत जननी है, प्रत्येक भारतीय को इसकी रक्षा का संकल्प करना चाहिए। गाय की सेवा अर्थात 35 करोड़ देवी-देवताओं की पूजा करना। अपनी पूरी जिंदगी और मरने के बाद भी गो-माता मनुष्य और प्रकृति के लिए उपयोगी है। भारत की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए श्री गोविंदाचार्य ने कहा कि भारत दुनिया का अनमोल देश है। अपने वैशिष्ट के कारण ही इसे देवभूमि और पुण्यभूमि का विशेषण मिला। चीन में एक कहावत सर्वत्र प्रचलित है कि इस जन्म में अच्छा काम करोगे तो अगला जन्म भारत में मिलेगा। भारत में 29 हजार किस्म की वनस्पति और 85 हजार से अधिक पशु-पक्षियों की नस्लें हैं। भारत में सूर्य देवता का प्रताप भी अद्वितीय है। दुनिया के अन्य देशों में भारत की तरह सूर्य का प्रकाश नहीं मिलता है। इसका हमारे जीवन पद काफी प्रभाव है। सूर्य के इसी प्रभाव के कारण यहां की गायों को भी विशेष गुण प्राप्त हुआ है। भारतीय गायों के दुध और घी में जो पीलापन है वह सूर्यतत्व है। यह सूर्य तत्व अन्य किसी प्रणी के दूध या किसी अन्य देश की गाय को प्राप्त नहीं है। क्योंकि भारतीय नस्ल की गायों में ही सूर्य तत्व को ग्रहण करने की क्षमता है।
श्री गोविंदाचार्य ने अंगेजी हुकूमत और स्वतंत्रता के बाद काले अंग्रेजों की हुकूमत पर गोवंश की कमी का ठीकरा फोड़ा। उन्होंने कहा कि सन 1800 में एक भारतीय पद 6 मवेशी होते थे, जबकि आजादी के वक्त दो भारतीय पर एक मवेशी ही बच पाया। आज हालात यह है कि 100 करोड़ की जनसंख्या पद मात्र 25 करोड़ गौवंश ही बचा है। यह इसलिए हुआ कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी उन्हीं की नीतियों को जारी रखा गया। चूंकि अंग्रेजों का मुख्य भोजन गो-मांस था इसलिए उन्होंने ऐसी नीतियां बनाई कि अधिकाधिक गो-वंश का उनके भोजन के लिए मारा जा सके। जबकि भारत में गा-वंश का उपयोग हमेशा से गो-दुग्ध, अन्य गो-उत्पाद और खेती तथा परिवहन आदि कार्यों के लिए होता था। उल्लेखनीय है कि 1857 से 1947 के बीच लगभग 40 करोड़ गो-वंश का वध किया गया। यह आज भी जारी है। देश के लाखों बूचड़खाने इसकी मिसाल हैं। भारत से गो-मांस का निर्यात आज भी निर्बाध गति से जारी है।
श्री गोविंदाचार्य ने कहा कि गाय का गोबर, मूत्र, और दुग्ध गुणकारी है। हम इसके बारे में जानते हुए भी लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कृषि में मशीनीकरण के कारण गो-वंश का उपयोग निरंतर कम होता जा रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि हमें गो विरोधी स्थितियां, भावना और नीतियों को दूर करना है। भारतीय नौकरशाही और काले अंग्रेजों ने पिछले 50 वर्षों में गाय के लिए घातक नीतियां बनाई। उन्होंने कहा कि गोशाला और वृद्धाश्रम स्वस्थ्य समाज की निशानी नहीं है। वृद्धों का स्थान घरों में और गो-माता का स्थान किसान के खूंटे पर ही होना चाहिए। उन्होंने इस बात पद जोर दिया कि प्रत्येक विकासखंड पर नंदीशाला और पशु चिकित्सालय होना चाहिए। बेहतर चारे के लिए प्रत्येक जिले में गो-अनुसंधान केन्द्र विकसित होना चाहिए। सरकार को कृषि, सिंचाई, परिवहन और उर्जा नीति गाय के अनुकूल बनाना चाहिए। परिवहन के लिए भी मानव श्रम, पशु परिवहन और बस और रेल का अनुपात तय किया जाना चाहिए।
श्री गोविंदाचार्य ने जोर देकर कहा कि जैसी दृष्टि होगी वैसी ही सृष्टि होगी। हमारा नजरिया बदलेगा तभी नजारा बदलेगा। गौ और गंगा माता की रक्षा करने से ही राष्ट्रीय पुनर्निर्माण होगा। गौ माता का मुद्दा सांप्रदायिक नहीं राष्ट्रीय है। उन्होंने दावा किया कि जिस दिन गौ-वंश की संख्या इंसान से अधिक हो जायेगी उस दिन भारत पुनः विश्वगुरु बन जायेगा। इसके पूर्व श्री गोविन्दाचार्य ने हरदा, खंडवा और बुरहानपुर में भी यात्रा-सभा को संबोधित किया।
मध्यभात में आयोजित अनेक उप-यात्राओं का इसी सप्ताह समापन हुआ। 22 से 29 नवम्बर, 09 तक लाखों हस्ताक्षर कराए गए। ग्राम स्तर पद 5 से 15 दिसंबर तक और 15 से 25 दिसंबर तक उप यात्राओं का आयोजन हुआ था। उप यात्राओं के समापन पर गौ-भक्तों और विद्वानों ने सभा को संबोधित किया। भोपाल सहित सभी सभाओं में हजारों की संख्या में उपस्थित ग्रामीणों और नागरिकों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने गाय की महिमा, गोवंश को खत्म करने के देशी-विदेशी षड्यंत्रों, सरकारी उपेक्षा, नागरिक लापरवाही और सज्जन शक्ति की उदासीनता पर प्रकाश डाला।
शुक्रवार, 1 जनवरी 2010
Launcing of Website of HSS and Sri Gurudakshina
Celebrated at Triolet, Mehashwarnath Mandir, Mauritius
( Dated : 27-Dec-2009)
Website was Launched by Swami Poornanand Ji, Organized by HSS Mauritius. The function was presided over by Sri Raghunath Deealji, Sanghchalak Mauritius and the chief speaker was Sri Prabhu Narain Srivastava(Prabhuji), Sah Prant Sangh Chalak, Avadh Prant, U.P., Rtd Chief Engineer and All Inda Organizing Secretary of Mahamana Malaviya Mission, India.
The website was launched in the presence of nearly hundred citizens of Mauritius. On this occasion Prabhuji highlighted the three Global problems .i.e. Global Terrorism, Global Recession and Global Warming. The entire world is engaged in resolving these subtle challenges mankind is ever facing. Hindu Dharam, since time immemorial has advocated life vision which addresses these problems in its entirety. It is because of this that the Hinduism has survived since thousands of centuries. The inclusiveness of Hinduism has the remedy of all these global problems. The mother earth should be milked not bled to satisfy the unending material desires of the mankind, which has resulted into global warming and global recession. The global terrorism is also the outcome of the life vision of exclusivist, who propagates their religion through violence. Shreemad Bhagwad Geeta and other Hindu Scriptures have been awakening the ill effects of Global Terrorism, Recession and Warming since beginning. It is a matter of satisfaction that mankind has at least started to recognize the efficacy of Hindu philosophy to bring about world piece and sustainable eco-friendly development, the testimony to which is the recitation of Vedic Richas in the Parliament of USA. It is a matter of pride that Mauritius has shown the path of cultural expansion for peace and brotherhood by Harmonizing French, English, Hindi, Bhojpuri and Creol languages. Besides this the foundation of Trayodash Maurisheshwar Nath Jyotirling, Gangal Talao( Grand Bassin) Mauritius is a step forward to expand its cultural identity across the world. Prabhuji requested all the Hindu saints of India to give the recognition to this Trayodash Maurisheshwar Nath Jyotirling.
After the speech of Prabhuji Swami Poornanand Blessed the HSS for expanding its work in Mauritius. The sanghchalak of Mauritius Sri Raghunath Deealji elaborated the importance of Gurupooja and Bhagwa Dhwaj. All the swayamsevaks offered their oblations and the program was concluded by prarthana.
By- Pragya Srivastava
Celebrated at Triolet, Mehashwarnath Mandir, Mauritius
( Dated : 27-Dec-2009)
Website was Launched by Swami Poornanand Ji, Organized by HSS Mauritius. The function was presided over by Sri Raghunath Deealji, Sanghchalak Mauritius and the chief speaker was Sri Prabhu Narain Srivastava(Prabhuji), Sah Prant Sangh Chalak, Avadh Prant, U.P., Rtd Chief Engineer and All Inda Organizing Secretary of Mahamana Malaviya Mission, India.
The website was launched in the presence of nearly hundred citizens of Mauritius. On this occasion Prabhuji highlighted the three Global problems .i.e. Global Terrorism, Global Recession and Global Warming. The entire world is engaged in resolving these subtle challenges mankind is ever facing. Hindu Dharam, since time immemorial has advocated life vision which addresses these problems in its entirety. It is because of this that the Hinduism has survived since thousands of centuries. The inclusiveness of Hinduism has the remedy of all these global problems. The mother earth should be milked not bled to satisfy the unending material desires of the mankind, which has resulted into global warming and global recession. The global terrorism is also the outcome of the life vision of exclusivist, who propagates their religion through violence. Shreemad Bhagwad Geeta and other Hindu Scriptures have been awakening the ill effects of Global Terrorism, Recession and Warming since beginning. It is a matter of satisfaction that mankind has at least started to recognize the efficacy of Hindu philosophy to bring about world piece and sustainable eco-friendly development, the testimony to which is the recitation of Vedic Richas in the Parliament of USA. It is a matter of pride that Mauritius has shown the path of cultural expansion for peace and brotherhood by Harmonizing French, English, Hindi, Bhojpuri and Creol languages. Besides this the foundation of Trayodash Maurisheshwar Nath Jyotirling, Gangal Talao( Grand Bassin) Mauritius is a step forward to expand its cultural identity across the world. Prabhuji requested all the Hindu saints of India to give the recognition to this Trayodash Maurisheshwar Nath Jyotirling.
After the speech of Prabhuji Swami Poornanand Blessed the HSS for expanding its work in Mauritius. The sanghchalak of Mauritius Sri Raghunath Deealji elaborated the importance of Gurupooja and Bhagwa Dhwaj. All the swayamsevaks offered their oblations and the program was concluded by prarthana.
By- Pragya Srivastava
सोमवार, 28 दिसंबर 2009
समाचार विश्व मंगल गौ-ग्राम यात्रा
29 दिसंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह सुरेश सोनी भोपाल में विवेकानन्द केन्द्र के कार्यकर्ता सम्मेलन में देश भर से आए कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक, भाजपा के पूर्व संगठन महासचिव और वरिष्ठ चिंतक-विचारक के.एन.गोविन्दाचार्य मध्यप्रदेश के भोपाल, होशंगाबाद, हरदा, खंडवा और बुरहानपुर के दौरे पद हैं। 29 से 30 दिसंबर के बीच वे भोपाल में पत्रकार और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों से मुलाकात करेंगे, वहीं वे हरदा, खंडवा और बुरहानपुर में विश्व मंगल गौ-ग्राम यात्रा को संबोधित करेंगे। 31 दिसंबर को वे राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की बैठक में भाग लेंगे।
अखिल भारतीय स्तर पद आयोजित विश्व मंगल गौ-ग्राम यात्रा 5 जनवरी, 2010 को भोपाल पहुंचेगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक, भाजपा के पूर्व संगठन महासचिव और वरिष्ठ चिंतक-विचारक के.एन.गोविन्दाचार्य मध्यप्रदेश के भोपाल, होशंगाबाद, हरदा, खंडवा और बुरहानपुर के दौरे पद हैं। 29 से 30 दिसंबर के बीच वे भोपाल में पत्रकार और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों से मुलाकात करेंगे, वहीं वे हरदा, खंडवा और बुरहानपुर में विश्व मंगल गौ-ग्राम यात्रा को संबोधित करेंगे। 31 दिसंबर को वे राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन की बैठक में भाग लेंगे।
अखिल भारतीय स्तर पद आयोजित विश्व मंगल गौ-ग्राम यात्रा 5 जनवरी, 2010 को भोपाल पहुंचेगी।
मंगलवार, 22 दिसंबर 2009
राम मंदिर आंदोलन का शंखनाद अप्रैल में
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रवीणभाई तोगडिय़ा ने साफ कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने का ब्लू प्रिंट 6 अप्रैल से शुरू हो रहे हरिद्वार के कुंभ मेले में साधु-संतों की अगुआई में तैयार होगा। वे कारसेवा या जो भी फैसला लेंगे, उसी आधार पर आंदोलन चलेगा। इसका नेतृत्व संत करेंगे। किसी नेता को मंच पर भी नहीं चढऩे देंगे। तोगडिय़ा ने कहा कुंभ में 6 अप्रैल को 20 हजार से ज्यादा साधु-संत मौजूद होंगे। विहिप संतों से आग्रह करेगी कि मंदिर आंदोलन का मार्ग प्रशस्त करें। उनकी मंशानुसार ही राममंदिर का संकल्प पूरा किया जाएगा। तोगडिय़ा ने कहा अलगाववाद, जेहाद, घुसपैठिए बांग्लादेशी और सच्चर कमेटी का समाधान इसी रास्ते से गुजरेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन चुनाव या वोटों के लिए नहीं होगा। इसका नेतृत्व साधु-संत ही करेंगे।
मंदिर निर्माण से मिटेगा जेहादी आतंकवादविहिप के हितरक्षक सम्मेलन में गरजे तोगडिय़ाइंदौर, सिटी रिपोर्टर। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रवीण भाई तोगडिय़ा ने ऐलान किया कि एक बार फिर राम मंदिर आंदोलन उठेगा। जेहादी आतंकवाद को मिटाने का रास्ता मंदिर निर्माण से ही गुजरेगा। यह लड़ाई कोई पीएम और सीएम बनाने की नहीं, बल्कि अखंड ब्रह्मांड के भगवान राम के मंदिर की है। वे विहिप के हित रक्षक सम्मेलन में गरज रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर मो. कासिम से लेकर मो. जिन्ना तक की मंदिर तोडऩे वाली मानसिकता खत्म नहीं की तो देश बंट जाएगा। भारत में अवैध बसे तीन लाख बांग्लादेशियों की विदाई का रास्ता भी मंदिर बनने से ही होगा।वंदे मातरम् का फतवा राष्ट्रद्रोह
डॉ. तोगडिय़ा ने कहा कि एक लाख मौलवियों के सम्मेलन में वंदे मातरम् का फतवा जारी किया गया। यह राष्ट्रद्रोह है। रंगनाथ मिश्र आधुनिक जिन्ना है, जिसने संसद में मुस्लिमों को आरक्षण देने की रपट पेश की है।हर तहसील में जिन्ना की औलादें
उन्होंने कहा अब तो भारत की हर तहसील में जिन्ना की औलादें पैदा हो गई हैं। इंदौर और उज्जैन में सिमी के नाम पर इनकी कोई कमी नहीं है। सम्मेलन में विहिप संयुक्त मंत्री स्वामी विद्यानंदजी ने भी विचार रखे। इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एस. वेदांतम, संगठन महामंत्री दिनेशचंद्र, संयुक्त महामंत्री स्वामी विद्यानंद, वरिष्ठ सलाहकार मंडल गिरिराज किशोर, मालवा प्रांत अध्यक्ष जड़ावचंद्र जैन, प्रांत मंत्री नारायणजी और प्रशासनिक व्यवस्था व प्रचार-प्रसार प्रमुख मुकेश जैन भी मौजूद थे। स्वास्थ्य खराब होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल सम्मेलन में नहीं आ पाए। हिंदुत्व के लिए काम करें गडकरी
इंदौर। विहिप के अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रवीण भाई तोगडिय़ा ने पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा में कहा कि भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को हिंदुत्व के लिए काम करना चाहिए। अगर वे ऐसा करते हैं तो करोड़ों हिंदुओं का भरोसा जीत पाएंगे।
मंदिर निर्माण से मिटेगा जेहादी आतंकवादविहिप के हितरक्षक सम्मेलन में गरजे तोगडिय़ाइंदौर, सिटी रिपोर्टर। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रवीण भाई तोगडिय़ा ने ऐलान किया कि एक बार फिर राम मंदिर आंदोलन उठेगा। जेहादी आतंकवाद को मिटाने का रास्ता मंदिर निर्माण से ही गुजरेगा। यह लड़ाई कोई पीएम और सीएम बनाने की नहीं, बल्कि अखंड ब्रह्मांड के भगवान राम के मंदिर की है। वे विहिप के हित रक्षक सम्मेलन में गरज रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर मो. कासिम से लेकर मो. जिन्ना तक की मंदिर तोडऩे वाली मानसिकता खत्म नहीं की तो देश बंट जाएगा। भारत में अवैध बसे तीन लाख बांग्लादेशियों की विदाई का रास्ता भी मंदिर बनने से ही होगा।वंदे मातरम् का फतवा राष्ट्रद्रोह
डॉ. तोगडिय़ा ने कहा कि एक लाख मौलवियों के सम्मेलन में वंदे मातरम् का फतवा जारी किया गया। यह राष्ट्रद्रोह है। रंगनाथ मिश्र आधुनिक जिन्ना है, जिसने संसद में मुस्लिमों को आरक्षण देने की रपट पेश की है।हर तहसील में जिन्ना की औलादें
उन्होंने कहा अब तो भारत की हर तहसील में जिन्ना की औलादें पैदा हो गई हैं। इंदौर और उज्जैन में सिमी के नाम पर इनकी कोई कमी नहीं है। सम्मेलन में विहिप संयुक्त मंत्री स्वामी विद्यानंदजी ने भी विचार रखे। इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एस. वेदांतम, संगठन महामंत्री दिनेशचंद्र, संयुक्त महामंत्री स्वामी विद्यानंद, वरिष्ठ सलाहकार मंडल गिरिराज किशोर, मालवा प्रांत अध्यक्ष जड़ावचंद्र जैन, प्रांत मंत्री नारायणजी और प्रशासनिक व्यवस्था व प्रचार-प्रसार प्रमुख मुकेश जैन भी मौजूद थे। स्वास्थ्य खराब होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल सम्मेलन में नहीं आ पाए। हिंदुत्व के लिए काम करें गडकरी
इंदौर। विहिप के अंतरराष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रवीण भाई तोगडिय़ा ने पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा में कहा कि भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को हिंदुत्व के लिए काम करना चाहिए। अगर वे ऐसा करते हैं तो करोड़ों हिंदुओं का भरोसा जीत पाएंगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ करेगा राष्ट्रीय सुरक्षा पर चिंतन
9-10 मार्च, 2010 में हरिद्वार में होगा अखिल भारतीय राष्ट्र-रक्षा कुंभ
भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश में सीमाई सुरक्षा के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी चिंतित है। संघ की चिंता समय-समय पर प्रस्तावों, वक्तव्यों और कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्त होती रही है। देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा केन्द्र और राज्यों की सरकारों के साथ ही आमलोगों की चिंता का विषय बने इस दिशा में कई प्रयास किए जा रहे हैं। संघ की प्रेरणा और पहल से देश के अनेक सुरक्षा विशेषज्ञों, सेना और पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारियों तथा अन्य तकनीकी और विशिष्ट क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने ‘फोरम फाॅर इंटीग्रेटेड नेशनल सिक्योरिटी’ (फिन्स) का गठन किया है। अखिल भारतीय स्तर पर गठित इस फोरम को सभी राज्यों में विस्तार दिया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि फिन्स को विस्तार देने और इसे प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्री इन्द्रेश कुमार देशभर में प्रवास कर रहे हैं। इसी सिलसिले में वे 21 दिसंबर को भोपाल आए थे। श्री इन्द्रेश कुमार ने 9-10 मार्च, 2010 में प्रस्तावित राष्ट्र रक्षा सम्मेलन के सिलसिले में भोपाल के विशिष्ट लोगों से चर्चा। यह सम्मेलन हरिद्वारा में होना प्रस्तावित है। इस सम्मेलन में देशभर से लगभग सात सौ प्रतिनिधि शामिल होंगे। ये सभी प्रतिनिधि सुरक्षा संबंधी मामलों से जुडे विशेषज्ञ होंगे। इन्द्रेश कुमार भोपाल के सेवानिवृत्त पुलिस, प्रशासन और सेना के लोगों से मिले और घंटो चर्चा की। उन्होंने बताया कि हरिद्वारा में आयोजित इस राष्ट्र रक्षा सम्मेलन में देश की आंतरिक, सीमाई और बाह्य सुरक्षा के विषयों पर विविध आयामों से विस्तृत चर्चा की जायेगी। विभिन्न तकनीकी सत्रों में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में सुरक्षा संबंधी समस्याओं और सरकार तथा सुरक्षा संबंधी एजेंसियों के साथ ही नागरिकों स्तर पर हाने वाली पहल के बारे में सुझाव, योजना और रणनीति संबंधी चर्चा भी होगी।
श्री इन्द्रश कुमार ने चर्चा उपस्थित सभी वरिष्ठ प्रतिभागियों से हरिद्वार में प्रस्तावित राष्ट्ररक्षा सम्मेलन में उपस्थित होने और इस सम्मेलन में अधिकाधिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति के लिए सभी से प्रयास करने का आग्रह भी किया। भोपाल की चर्चा में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस आर डी शुक्ला, सेवानिवृत्त डीजीपी एन. नटराजन,एचएम जोशी, सुभाषचन्द्र त्रिपाठी, वीपी साहनी, कैप्टन वीपी सिंह, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी डीएस गिल और जयकृष्ण गौड़ आदि उपस्थित थे। अन्य राज्य की तरह ही मध्यप्रदेश से भी प्रतिनिधियों की सूची तैयार की जायेगी। मध्यप्रदेश के सुरक्षा और रक्षा विशेषज्ञों का भी अच्छी संख्या में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जायेगा।
गुरुवार, 3 दिसंबर 2009
इस लिंक पर जाइये और गौ को बचाने के लिये हस्ताक्षर किजिये
http://eng.gougram.org/signature-campaign-for-the-welfare-of-indian-cows/
सोमवार, 16 नवंबर 2009
‘हरित तकनीक द्वारा अक्षम विकास‘ पर केद्रित होगा
द्वितीय भारतीय विज्ञान सम्मेलन
3 दिसम्बर, 2009 से इंदौर में
भोपाल (म.प्र) विभिन्न भारतीय भाषाओं के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रकीर्णन हेतु आयोजित भारतीय विज्ञान सम्मेलन का द्वितीय आयोजन इंदौर में 3 दिसम्बर से होने जा रहा है। जो हरित तकनीक द्वारा अक्षम विकास पर केंद्रित होगा ।
सम्मेलन का आयोजन आमजन के बीच लाभार्थ विज्ञान आंदोलन ‘‘विज्ञान भारती‘‘ म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा किया जा रहा है। प्रथम भारतीय विज्ञान सम्मेलन का आयोजन भोपाल में किया गया था जिसमें प्रख्यात वैज्ञानिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी भाग लिया था ।
ग्लोबल वार्मिग की विश्व व्यापी समस्या की भारतीय दृष्टि से समाधान प्रस्तुत करने के लिए द्वितीय भारतीय विज्ञान सम्मेलन का विषय हरित तकनीक द्वारा अक्षम विकास है ।
ज्ञात है कि भारतीय विज्ञान सम्मेलन एक ऐसा प्रयास है जिसमें समस्त भारतीय भाषाओं में शोध पत्रों को प्रस्तुत किया जा सकता है। इस सम्मेलन की मूल अवधारणा है कि भारतीय भाषाओं के उपयोग से ही विज्ञान को भारतीय समाज के लिए कल्याणकारी बनाया जा सकता है।
सम्मेलन के सफल आयोजन हेतु मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा तैयारियों की समीक्षा की गई । श्री चैहान ने विज्ञान सम्मेलन को गरिमा तथा उद्देश्य परकता के साथ आयोजित करने पर बल दिया ।
इस वर्ष सम्मेलन के अध्यक्ष देश के परम कम्प्युटर के जनक डा. विजय भाटकर होंगे ं साथ ही पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. कलाम इसरो के चैयरमैन प्रो. जी माधवन नायर, सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक श्री मशालकर जी, स्वामीनायन, परमाणु उर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोड़कर भी सम्मिलित होंगे ।
इस अवसर पर 27 नवम्बर से देवी अहिल्या परिसर में एक अखिल भारतीय प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा । जिसमें म0प्र0 शासन सहित भारत सरकार के प्रतिष्ठित विज्ञान संस्थानों की उपलब्धियों का चित्रण होगा ।
द्वितीय भारतीय विज्ञान सम्मेलन,2009 प्रो. (डा.) जे.सी.बोस की एक सौ पचासवी जन्म शताब्दी को समर्पित है। भारतीय विज्ञान उन वैज्ञानिक सिद्धान्तों पर आधारित है जो जीवन के प्रत्येक मार्ग पर वातावरण को बिना किसी क्षति के आगे बढ़ने का समाधान प्रस्तुत करता है। वर्तमान में पाश्चात्य जगत में आ रही नवीन उर्जा सम्बन्धी धारणाएं हमारे पुरातन ज्ञान की सार्थकता को प्रमाणित कर रही है ।
हरित तकनीकी द्वारा राष्ट्र और उनके समाजों की सामाजिक, आर्थिक विभिन्नताओं, शहरीकरण, ग्रामीण निर्धनता पर्यावरणीय क्षय और विषय विकास की समस्याओं को हल किया जा सकता है।
द्वितीय भारतीय विज्ञान सम्मेलन
3 दिसम्बर, 2009 से इंदौर में
भोपाल (म.प्र) विभिन्न भारतीय भाषाओं के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रकीर्णन हेतु आयोजित भारतीय विज्ञान सम्मेलन का द्वितीय आयोजन इंदौर में 3 दिसम्बर से होने जा रहा है। जो हरित तकनीक द्वारा अक्षम विकास पर केंद्रित होगा ।
सम्मेलन का आयोजन आमजन के बीच लाभार्थ विज्ञान आंदोलन ‘‘विज्ञान भारती‘‘ म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा किया जा रहा है। प्रथम भारतीय विज्ञान सम्मेलन का आयोजन भोपाल में किया गया था जिसमें प्रख्यात वैज्ञानिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी भाग लिया था ।
ग्लोबल वार्मिग की विश्व व्यापी समस्या की भारतीय दृष्टि से समाधान प्रस्तुत करने के लिए द्वितीय भारतीय विज्ञान सम्मेलन का विषय हरित तकनीक द्वारा अक्षम विकास है ।
ज्ञात है कि भारतीय विज्ञान सम्मेलन एक ऐसा प्रयास है जिसमें समस्त भारतीय भाषाओं में शोध पत्रों को प्रस्तुत किया जा सकता है। इस सम्मेलन की मूल अवधारणा है कि भारतीय भाषाओं के उपयोग से ही विज्ञान को भारतीय समाज के लिए कल्याणकारी बनाया जा सकता है।
सम्मेलन के सफल आयोजन हेतु मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा तैयारियों की समीक्षा की गई । श्री चैहान ने विज्ञान सम्मेलन को गरिमा तथा उद्देश्य परकता के साथ आयोजित करने पर बल दिया ।
इस वर्ष सम्मेलन के अध्यक्ष देश के परम कम्प्युटर के जनक डा. विजय भाटकर होंगे ं साथ ही पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. कलाम इसरो के चैयरमैन प्रो. जी माधवन नायर, सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक श्री मशालकर जी, स्वामीनायन, परमाणु उर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोड़कर भी सम्मिलित होंगे ।
इस अवसर पर 27 नवम्बर से देवी अहिल्या परिसर में एक अखिल भारतीय प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा । जिसमें म0प्र0 शासन सहित भारत सरकार के प्रतिष्ठित विज्ञान संस्थानों की उपलब्धियों का चित्रण होगा ।
द्वितीय भारतीय विज्ञान सम्मेलन,2009 प्रो. (डा.) जे.सी.बोस की एक सौ पचासवी जन्म शताब्दी को समर्पित है। भारतीय विज्ञान उन वैज्ञानिक सिद्धान्तों पर आधारित है जो जीवन के प्रत्येक मार्ग पर वातावरण को बिना किसी क्षति के आगे बढ़ने का समाधान प्रस्तुत करता है। वर्तमान में पाश्चात्य जगत में आ रही नवीन उर्जा सम्बन्धी धारणाएं हमारे पुरातन ज्ञान की सार्थकता को प्रमाणित कर रही है ।
हरित तकनीकी द्वारा राष्ट्र और उनके समाजों की सामाजिक, आर्थिक विभिन्नताओं, शहरीकरण, ग्रामीण निर्धनता पर्यावरणीय क्षय और विषय विकास की समस्याओं को हल किया जा सकता है।
प्रज्ञा प्रवाह द्वारा वंदेमातरम् पर विमर्श
मुस्लिम देशो के राष्ट्रगीत में मातृवंदना, फिर वंदेमातरम् गैर इस्लामी कैसे!
भोपाल। जब विश्व के अधिकांश मुस्लिम देशों के राष्ट्रगीतों में मातृभूमि प्रतीकों का चित्रण है फिर राष्ट्रगान वंदेमातरम् को गैर इस्लामी कैसे कहा जा सकता है। मुसलमानों द्वारा वंदेमातरम् गायन का विरोध अज्ञानता का परिचायक है। यह विचार मनोज श्रीवास्तव, आयुक्त जनसम्पर्क मध्यप्रदेश शासन ने ‘प्रज्ञा प्रवाह‘ संस्थान द्वारा वंदेमातरम् पर आयोजित परिचर्चा में व्यक्त किया।
वन्दे मातरम् - गीत के साहित्येतिहासिक महत्व का अध्ययन करने और इसी विषय पर पुस्तिका लिखने वाले श्री श्रीवास्तव ने विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि वंदेमातरम् का विरोध करने वाले सबसे पहले इसका अध्ययन करें। उन्होंने इसे नापसंद करने वाले राजेन्द्र यादव, ए.जी.नूरानी, शम्सुल इस्लाम, अम्बरीश आदि के वक्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राष्ट्रगान सांप्रदायिकता कट्टरपन से परे मातृभूमि के प्रति समर्पित भावना का प्रतीक है और इस संवैधानिक मान्यता मिली है।
वरिष्ठ समाजसेवी लज्जाशंकर हरदेनिया ने भी वंदेमातरम् की ऐतिहासिक और संवैधानिक भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब भी संवैधानिक और पारंपरिक मान्यताओं के बीच टकराव हो तो हमें संवैधानिक दायित्वों को पालन करना चाहिए। इसी से आपसी भाईचारा और राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत हो सकेगी। उन्होंने जमाएते उलेमा हिंद द्वारा देवबंद में जारी वंदेमातरम् के फतवे के साथ ही उलेमाओं के कट्टरपंथी अन्य प्रस्तावों की भी आलोचना की । म.प्र. अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष मो. अनवर खान ने उलेमाओं द्वारा वंदेमातरम् के खिलाफ जारी फतवे को ‘सियासी चाल‘ बताते हुए कहा कि जब उल्लमा इकबाल ने वंदेमातरम् का विरोध नहीं किया फिर आजकल के फिरकापरस्ती ताकतों द्वारा इसका विरोध गैर वाजिब है। वैसे भी इस फतवे की कोई शरियत हैसियत नहीं है और न ही यह कोई खुदा का हुक्म है जिसे माना जाए। उन्होंने मुस्लिम समाज को देश ओर इसकी संस्कृति के प्रति दायित्वपूर्ण रवैया अपनाने का आहवान किया। देवबंद से तालीम प्राप्त भोपाल के मौलाना अख्तर हाशमी ने भी इस तरह के फतवों को कोई अहमियत न दिए जाने की पुरजोर वकालत की । उन्होंने कहा कि मुझे और मेरे जैसे लाखों मुसलमानों को इस बात पर फक्र है कि वो पूरी आजादी और मजहबी उसूलों के साथ इस देश में रह रहे हैं। श्री हाशमी ने कहा कि उलेमा कौम को प्रगति के रास्ते पर ले जाने वाले कदम उठाएं न कि गैर जरूरी मुद्दों पर विवाद और फसाद वाले कदम।
प्रख्यात चिंतक और धर्मपाल शोधपीठ के निदेशक प्रो. रामेश्वर मिश्र ‘पंकज‘ ने देवबंद में वंदेमातरम के खिलाफ जारी फतवे को गहरी सांस्कृतिक कशमकश से उपजी सोच बताते हुए कहा कि ऐसे मुद्दो पर फतवे जारी करने की बजाय मुस्लिम संवाद का रास्ता अपनाए जिससे सही रास्ता निकल सके। विमर्श का आयोजन स्वराज संस्थान के सभाकक्ष में ‘प्रज्ञा प्रवाह‘ द्वारा किया गया था। प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत संयोज बालकृष्ण दवे ने उपस्थिति सुधीजन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रज्ञा प्रवाह के सह-संयोजक दीपक शर्मा ने किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार और मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डाॅ. देवेन्द्र दीपक, अधिवक्ता परिषद् के ब्रजकिशोर सांघी, मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एकता परिषद् के रमेश शर्मा, संस्कार भारती के कामतानाथ वैशम्पायन, राष्ट्र सेविका समिति की सुखप्रीत कौर सहित काफी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।
मुस्लिम देशो के राष्ट्रगीत में मातृवंदना, फिर वंदेमातरम् गैर इस्लामी कैसे!
भोपाल। जब विश्व के अधिकांश मुस्लिम देशों के राष्ट्रगीतों में मातृभूमि प्रतीकों का चित्रण है फिर राष्ट्रगान वंदेमातरम् को गैर इस्लामी कैसे कहा जा सकता है। मुसलमानों द्वारा वंदेमातरम् गायन का विरोध अज्ञानता का परिचायक है। यह विचार मनोज श्रीवास्तव, आयुक्त जनसम्पर्क मध्यप्रदेश शासन ने ‘प्रज्ञा प्रवाह‘ संस्थान द्वारा वंदेमातरम् पर आयोजित परिचर्चा में व्यक्त किया।
वन्दे मातरम् - गीत के साहित्येतिहासिक महत्व का अध्ययन करने और इसी विषय पर पुस्तिका लिखने वाले श्री श्रीवास्तव ने विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि वंदेमातरम् का विरोध करने वाले सबसे पहले इसका अध्ययन करें। उन्होंने इसे नापसंद करने वाले राजेन्द्र यादव, ए.जी.नूरानी, शम्सुल इस्लाम, अम्बरीश आदि के वक्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राष्ट्रगान सांप्रदायिकता कट्टरपन से परे मातृभूमि के प्रति समर्पित भावना का प्रतीक है और इस संवैधानिक मान्यता मिली है।
वरिष्ठ समाजसेवी लज्जाशंकर हरदेनिया ने भी वंदेमातरम् की ऐतिहासिक और संवैधानिक भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब भी संवैधानिक और पारंपरिक मान्यताओं के बीच टकराव हो तो हमें संवैधानिक दायित्वों को पालन करना चाहिए। इसी से आपसी भाईचारा और राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत हो सकेगी। उन्होंने जमाएते उलेमा हिंद द्वारा देवबंद में जारी वंदेमातरम् के फतवे के साथ ही उलेमाओं के कट्टरपंथी अन्य प्रस्तावों की भी आलोचना की । म.प्र. अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष मो. अनवर खान ने उलेमाओं द्वारा वंदेमातरम् के खिलाफ जारी फतवे को ‘सियासी चाल‘ बताते हुए कहा कि जब उल्लमा इकबाल ने वंदेमातरम् का विरोध नहीं किया फिर आजकल के फिरकापरस्ती ताकतों द्वारा इसका विरोध गैर वाजिब है। वैसे भी इस फतवे की कोई शरियत हैसियत नहीं है और न ही यह कोई खुदा का हुक्म है जिसे माना जाए। उन्होंने मुस्लिम समाज को देश ओर इसकी संस्कृति के प्रति दायित्वपूर्ण रवैया अपनाने का आहवान किया। देवबंद से तालीम प्राप्त भोपाल के मौलाना अख्तर हाशमी ने भी इस तरह के फतवों को कोई अहमियत न दिए जाने की पुरजोर वकालत की । उन्होंने कहा कि मुझे और मेरे जैसे लाखों मुसलमानों को इस बात पर फक्र है कि वो पूरी आजादी और मजहबी उसूलों के साथ इस देश में रह रहे हैं। श्री हाशमी ने कहा कि उलेमा कौम को प्रगति के रास्ते पर ले जाने वाले कदम उठाएं न कि गैर जरूरी मुद्दों पर विवाद और फसाद वाले कदम।
प्रख्यात चिंतक और धर्मपाल शोधपीठ के निदेशक प्रो. रामेश्वर मिश्र ‘पंकज‘ ने देवबंद में वंदेमातरम के खिलाफ जारी फतवे को गहरी सांस्कृतिक कशमकश से उपजी सोच बताते हुए कहा कि ऐसे मुद्दो पर फतवे जारी करने की बजाय मुस्लिम संवाद का रास्ता अपनाए जिससे सही रास्ता निकल सके। विमर्श का आयोजन स्वराज संस्थान के सभाकक्ष में ‘प्रज्ञा प्रवाह‘ द्वारा किया गया था। प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत संयोज बालकृष्ण दवे ने उपस्थिति सुधीजन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रज्ञा प्रवाह के सह-संयोजक दीपक शर्मा ने किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार और मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डाॅ. देवेन्द्र दीपक, अधिवक्ता परिषद् के ब्रजकिशोर सांघी, मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एकता परिषद् के रमेश शर्मा, संस्कार भारती के कामतानाथ वैशम्पायन, राष्ट्र सेविका समिति की सुखप्रीत कौर सहित काफी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।
सोमवार, 12 अक्टूबर 2009
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल, युगाब्द 5111
दिनांक: 9,10,11 अक्टूबर, 2009
राजगृह, नालन्दा (बिहार)
प्रस्ताव क्र॰: 1
सीमा सुरक्षा सुदृढ़ करें
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल भारत - तिब्बत (चीन अधिकृत) सीमा पर हुए हाल के घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करता है। विस्तारवादी चीन द्वारा हमारे भू-भाग पर कब्जा जमाने के निरंतर प्रयासों को कई समाचार माध्यमों ने उजागर किया है और अपने सुरक्षा विभाग के जिम्मेवार अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है।
अकेले गत वर्ष में ही इन रपटों ने चीन की ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ द्वारा नियंत्रण रेखा के
270 उल्लंघन और ‘आक्रामक सीमा चैकसी’ की 2285 घटनाएँ होने की पुष्टि की है। यह हमारी राजनीतिक व्यवस्था पर दुःखद टिप्पणी है कि हमारे भू-भाग के बारे में विरोधियों की कुटिल योजनाओं के प्रति देश की जनता को सचेत करने के स्थान पर कानूनी कार्यवाही द्वारा मीडिया के स्वरों को दबाने का प्रयास हुआ है और आसन्न खतरे को निर्लज्जतापूर्वक कम दिखाने का भी प्रयास हुआ है। चीन की आक्रामक गतिविधियों के विरोध में अपनी तैयारी के विषय में हमारे नेताओं द्वारा दिये जा रहे पराभूत मनोवृत्ति वाले वक्तव्य अत्यन्त निराशाजनक एवं मनोबल गिराने वाले हैं।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे आस-पास के देशों के आक्रामक व्यवहार के प्रति हमारी प्रतिक्रिया सदैव ढीली-ढाली रहती है। परम श्रद्धेय दलाई लामा को शरण देने के ऐतिहासिक निर्णय को छोड़ दें तो, तिब्बत के प्रश्न पर हमने निरंतर गलतियाँ की हैं और अंततः सार्वभौम व स्वतंत्र तिब्बत पर चीनी कब्जे को मान्यता ही दे दी है। चीन ने 50 के दशक में लद्दाख के अक्साई चिन पर कब्जा जमा लिया। हमारे अन्य भी भू-भाग हड़पने के चीन के षड्यंत्र के परिणामस्वरूप 1987 में सुंदोरांग चू घाटी के विषय में हमें अपमानजनक समझौता करना पड़ा। हमारी कमजोरी का लाभ उठाकर अब तो चीन ने पूरे अरुणाचल प्रदेश पर ही अपना दावा करना प्रारम्भ कर दिया है।
अ.भा.का.मं. का मानना है कि इस प्रकार के आक्रमणकारी रवैये पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया सर्वथा अपर्याप्त रही है। कार्यकारी मंडल सरकार से आवाहन करता है कि भारत-तिब्बत सीमा को और साथ ही साथ समुद्री सीमा, भारत-पाक एवं भारत-बांग्लादेश सीमा को भी सुदृढ़ करने के लिए तुरन्त कदम उठाए। चीन द्वारा सीमा के उस पार भारी सैन्य बल का एकत्रीकरण और ढाँचागत व्यवस्थाओं के निर्माण को देखते हुए हमें भारत-तिब्बत सीमा पर अपने सैन्य बल की प्रत्युत्तर क्षमता को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता है।
कूटनीतिक संवाद, घेरना और हमारे शत्रुओं को प्रोत्साहन देना - इन तीन बातों का भारत को परेशान करने के लिए चीन व्यूहात्मक शस्त्र के रूप में प्रयोग करता है। दक्षिण म्यांमा के
कोको द्वीप में स्थित उनकी गश्ती चैकी को उन्होंने पूर्णरूपेण सेना चैकी के रूप में विकसित कर लिया है। श्रीलंका में चीन एक वाणिज्य बंदरगाह का निर्माण कर रहा है जबकि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में उसके द्वारा बनाया गया ग्वादर सैनिक बंदरगाह कामकाज के लिये तैयार हो चुका है। एक ओर वह भारत-तिब्बत सीमा को सैनिकी उŸोजना के लिये उपयोग में ला रहा है तो दूसरी ओर पूर्वोŸार भारत में स्थित आतंकवादी और राष्ट्रविरोधी तत्वों की मदद करने के लिए भारत-म्यांमा सीमा का दुरुपयोग कर रहा है। वह भारत को तोड़ने की बात तक करने लगा है।
कार्यकारी मंडल को खेद के साथ कहना पड़ता है कि सरकार के इस ढुलमुल रवैये
की कीमत भारत को न केवल सीमा पर अपितु कूटनीतिक मोर्चे पर भी चुकानी पड़ रही है।
‘ एशियन डेवलपमेंट बैंक ’ में अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा उठाकर उस राज्य के विकास के लिए ऋण प्राप्त करने के भारत के प्रयासों को बाधित करने में चीन सफल हुआ है। चीन ने परमाणु आपूर्ति समूह के देशों को भारत के विरुद्ध लगे प्रतिबंधों को हटाने से रोकने का असफल प्रयास भी किया है।
अ.भा.का.मं. सरकार को स्मरण दिलाना चाहता है कि उसे संसद द्वारा 14 नवम्बर, 1962 को पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव की भावना के प्रकाश में कदम उठाना चाहिए, जिसमें चीन द्वारा हड़पी गई सारी भूमि वापस प्राप्त करने की बात स्पष्ट रूप से कही गई थी। भारत सरकार को चीन से स्पष्ट रूप से कह देना चाहिए कि वह पश्चिमी क्षेत्र में हड़पे गये भू-भाग को वापस करे और अन्य क्षेत्रों के संदर्भ में कोई दावा पेश न करे। चीन से कहा जाए कि वह मैकमोहन रेखा को भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के रूप में उसी तरह मान्यता दे जिस तरह उसने चीन-म्यांमा सीमा पर उसे दी है।
यह बात चिन्ताजनक है कि अरुणाचल प्रदेश व कश्मीर के नागरिकों को चीन ‘पेपर वीसा’ दे रहा है। इस उकसाने वाली कारवाई से चीन दिखाना चाहता है कि अरुणाचल प्रदेश व कश्मीर को वह भारत के अविभाज्य अंग के रूप में स्वीकार नहीं करता। कार्यकारी मंडल माँग करता है कि सरकार आव्रजन अधिकारियों को आदेश दे कि, लोगों को देश से बाहर जाने के लिये इस प्रकार के ‘पेपर वीसा’ के प्रयोग पर तत्काल प्रतिबंध लगाये। आक्रामक दौत्य नीति के साथ इस प्रकार के दृढ़ कदम ही चीन के संबंध में अनुकूल परिणाम दे सकते हैं।
भारत-पाक मोर्चे पर भी इसी तरह की चिंताओं को कार्यकारी मंडल रेखांकित करना चाहता है। विशेषकर 9 जुलाई 2009 का भारत और पाक के प्रधानमंत्रियों का शर्म-अल-शेख का
संयुक्त वक्तव्य देश को स्तब्ध कर देने वाला है। अनेक विशेषज्ञ और विभिन्न राजनीतिक दलो के नेताओं ने इस वक्तव्य की दौत्य संबंधी भारी भूलों को उजागर किया है, जैसे - बलूचिस्तान मुद्दे को उसमें लाना और पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को जारी रखने पर भी उससे वात्र्ता पुनः प्रारम्भ करने की सहमति व्यक्त करना।
अ.भा.का.मं. माँग करता है कि पाकिस्तान के संबंध में भी संसद के 22 फरवरी 1994 के सर्वसम्मत प्रस्ताव की भावना का सरकार पालन करे, जिसमें कहा गया है कि पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में वापस लाना ही एक मात्र मुद्दा है।
कार्यकारी मंडल हमारी सीमाओं की रक्षा में लगे बहादुर जवानों एवं अधिकारियों के शौर्यपूर्ण कृत्यों का अभिनंदन करता है और देशवासियों से आवाहन करता है कि वे सदैव सतर्क रह कर सरकार को अपनी भौगोलिक अखंडता एवं स्वाभिमान की रक्षा करने के लिए बाध्य करें ।
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल, युगाब्द 5111
दिनांक: 9,10,11 अक्टूबर, 2009
राजगृह, नालन्दा (बिहार)
प्रस्ताव क्र॰: 1
सीमा सुरक्षा सुदृढ़ करें
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल भारत - तिब्बत (चीन अधिकृत) सीमा पर हुए हाल के घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करता है। विस्तारवादी चीन द्वारा हमारे भू-भाग पर कब्जा जमाने के निरंतर प्रयासों को कई समाचार माध्यमों ने उजागर किया है और अपने सुरक्षा विभाग के जिम्मेवार अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है।
अकेले गत वर्ष में ही इन रपटों ने चीन की ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी’ द्वारा नियंत्रण रेखा के
270 उल्लंघन और ‘आक्रामक सीमा चैकसी’ की 2285 घटनाएँ होने की पुष्टि की है। यह हमारी राजनीतिक व्यवस्था पर दुःखद टिप्पणी है कि हमारे भू-भाग के बारे में विरोधियों की कुटिल योजनाओं के प्रति देश की जनता को सचेत करने के स्थान पर कानूनी कार्यवाही द्वारा मीडिया के स्वरों को दबाने का प्रयास हुआ है और आसन्न खतरे को निर्लज्जतापूर्वक कम दिखाने का भी प्रयास हुआ है। चीन की आक्रामक गतिविधियों के विरोध में अपनी तैयारी के विषय में हमारे नेताओं द्वारा दिये जा रहे पराभूत मनोवृत्ति वाले वक्तव्य अत्यन्त निराशाजनक एवं मनोबल गिराने वाले हैं।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे आस-पास के देशों के आक्रामक व्यवहार के प्रति हमारी प्रतिक्रिया सदैव ढीली-ढाली रहती है। परम श्रद्धेय दलाई लामा को शरण देने के ऐतिहासिक निर्णय को छोड़ दें तो, तिब्बत के प्रश्न पर हमने निरंतर गलतियाँ की हैं और अंततः सार्वभौम व स्वतंत्र तिब्बत पर चीनी कब्जे को मान्यता ही दे दी है। चीन ने 50 के दशक में लद्दाख के अक्साई चिन पर कब्जा जमा लिया। हमारे अन्य भी भू-भाग हड़पने के चीन के षड्यंत्र के परिणामस्वरूप 1987 में सुंदोरांग चू घाटी के विषय में हमें अपमानजनक समझौता करना पड़ा। हमारी कमजोरी का लाभ उठाकर अब तो चीन ने पूरे अरुणाचल प्रदेश पर ही अपना दावा करना प्रारम्भ कर दिया है।
अ.भा.का.मं. का मानना है कि इस प्रकार के आक्रमणकारी रवैये पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया सर्वथा अपर्याप्त रही है। कार्यकारी मंडल सरकार से आवाहन करता है कि भारत-तिब्बत सीमा को और साथ ही साथ समुद्री सीमा, भारत-पाक एवं भारत-बांग्लादेश सीमा को भी सुदृढ़ करने के लिए तुरन्त कदम उठाए। चीन द्वारा सीमा के उस पार भारी सैन्य बल का एकत्रीकरण और ढाँचागत व्यवस्थाओं के निर्माण को देखते हुए हमें भारत-तिब्बत सीमा पर अपने सैन्य बल की प्रत्युत्तर क्षमता को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता है।
कूटनीतिक संवाद, घेरना और हमारे शत्रुओं को प्रोत्साहन देना - इन तीन बातों का भारत को परेशान करने के लिए चीन व्यूहात्मक शस्त्र के रूप में प्रयोग करता है। दक्षिण म्यांमा के
कोको द्वीप में स्थित उनकी गश्ती चैकी को उन्होंने पूर्णरूपेण सेना चैकी के रूप में विकसित कर लिया है। श्रीलंका में चीन एक वाणिज्य बंदरगाह का निर्माण कर रहा है जबकि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में उसके द्वारा बनाया गया ग्वादर सैनिक बंदरगाह कामकाज के लिये तैयार हो चुका है। एक ओर वह भारत-तिब्बत सीमा को सैनिकी उŸोजना के लिये उपयोग में ला रहा है तो दूसरी ओर पूर्वोŸार भारत में स्थित आतंकवादी और राष्ट्रविरोधी तत्वों की मदद करने के लिए भारत-म्यांमा सीमा का दुरुपयोग कर रहा है। वह भारत को तोड़ने की बात तक करने लगा है।
कार्यकारी मंडल को खेद के साथ कहना पड़ता है कि सरकार के इस ढुलमुल रवैये
की कीमत भारत को न केवल सीमा पर अपितु कूटनीतिक मोर्चे पर भी चुकानी पड़ रही है।
‘ एशियन डेवलपमेंट बैंक ’ में अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा उठाकर उस राज्य के विकास के लिए ऋण प्राप्त करने के भारत के प्रयासों को बाधित करने में चीन सफल हुआ है। चीन ने परमाणु आपूर्ति समूह के देशों को भारत के विरुद्ध लगे प्रतिबंधों को हटाने से रोकने का असफल प्रयास भी किया है।
अ.भा.का.मं. सरकार को स्मरण दिलाना चाहता है कि उसे संसद द्वारा 14 नवम्बर, 1962 को पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव की भावना के प्रकाश में कदम उठाना चाहिए, जिसमें चीन द्वारा हड़पी गई सारी भूमि वापस प्राप्त करने की बात स्पष्ट रूप से कही गई थी। भारत सरकार को चीन से स्पष्ट रूप से कह देना चाहिए कि वह पश्चिमी क्षेत्र में हड़पे गये भू-भाग को वापस करे और अन्य क्षेत्रों के संदर्भ में कोई दावा पेश न करे। चीन से कहा जाए कि वह मैकमोहन रेखा को भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के रूप में उसी तरह मान्यता दे जिस तरह उसने चीन-म्यांमा सीमा पर उसे दी है।
यह बात चिन्ताजनक है कि अरुणाचल प्रदेश व कश्मीर के नागरिकों को चीन ‘पेपर वीसा’ दे रहा है। इस उकसाने वाली कारवाई से चीन दिखाना चाहता है कि अरुणाचल प्रदेश व कश्मीर को वह भारत के अविभाज्य अंग के रूप में स्वीकार नहीं करता। कार्यकारी मंडल माँग करता है कि सरकार आव्रजन अधिकारियों को आदेश दे कि, लोगों को देश से बाहर जाने के लिये इस प्रकार के ‘पेपर वीसा’ के प्रयोग पर तत्काल प्रतिबंध लगाये। आक्रामक दौत्य नीति के साथ इस प्रकार के दृढ़ कदम ही चीन के संबंध में अनुकूल परिणाम दे सकते हैं।
भारत-पाक मोर्चे पर भी इसी तरह की चिंताओं को कार्यकारी मंडल रेखांकित करना चाहता है। विशेषकर 9 जुलाई 2009 का भारत और पाक के प्रधानमंत्रियों का शर्म-अल-शेख का
संयुक्त वक्तव्य देश को स्तब्ध कर देने वाला है। अनेक विशेषज्ञ और विभिन्न राजनीतिक दलो के नेताओं ने इस वक्तव्य की दौत्य संबंधी भारी भूलों को उजागर किया है, जैसे - बलूचिस्तान मुद्दे को उसमें लाना और पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को जारी रखने पर भी उससे वात्र्ता पुनः प्रारम्भ करने की सहमति व्यक्त करना।
अ.भा.का.मं. माँग करता है कि पाकिस्तान के संबंध में भी संसद के 22 फरवरी 1994 के सर्वसम्मत प्रस्ताव की भावना का सरकार पालन करे, जिसमें कहा गया है कि पाक अधिकृत कश्मीर को भारत में वापस लाना ही एक मात्र मुद्दा है।
कार्यकारी मंडल हमारी सीमाओं की रक्षा में लगे बहादुर जवानों एवं अधिकारियों के शौर्यपूर्ण कृत्यों का अभिनंदन करता है और देशवासियों से आवाहन करता है कि वे सदैव सतर्क रह कर सरकार को अपनी भौगोलिक अखंडता एवं स्वाभिमान की रक्षा करने के लिए बाध्य करें ।
मध्यप्रदेश में एनजीओ पंचायत के मायने
अनिल सौमित्र
12 अक्टूबर को प्रदेश की राजधानी भोपाल में एनजीओ पंचायत आहूत की गई है। पहले यह पंचायत 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन किया जाना था। सरकार ने गांधीजी से संबंधित दिवस पर एनजीओ पंचायत कर कुछ विशेष संदेश देने की सोची होगी। लेकिन किन्ही कारणों से यह पंचायत अब 12 अक्टूबर को की जा रही है। दिवस चाहे कोई भी हो, इस पंचायत का पूर्व नियोजित कोई उद्देश्य अवश्य होगा। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चैहान ने ‘‘स्वर्णिम मध्यप्रदेश’’ का नारा दिया है। सरकार ने 2013 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उल्लेखनीय है कि सिर्फ भाजपा सरकार ही नहीं, संपूर्ण भाजपा और कहें तो संपूर्ण राष्ट्रवादी शक्तियों की यही अभीप्सा है - परम् वैभवम् नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्’ अर्थात् अपने देश को परम वैभव के शिखर तक ले जाना है। राष्ट्र के परम वैभव का सपना तभी सकार होगा जब एक-एक प्रदेश परम् वैभव की ओर अग्रसर होगा।
स्वप्न का संबंध स्वप्नद्रष्ट्रा से भी है। स्वप्न तो कोई भी देख सकता है, लेकिन उसे साकार वहीं कर सकता है जो कुशल योजनाकार और रणनीतिकार हो। स्वप्न को नीति, योजना और रणनीति दिए बिना साकार करना संभव नहीं है। आजादी के बाद अनेक पार्टियों और सरकारों ने सुखद स्वप्न देखे। लेकिन ये स्वप्न नारों में तब्दिल होकर रह गए। क्या भाजपा सरकार के मुखिया शिवराज का स्वप्न भी नारे में तब्दील होकर रह जायेगा! अन्य पार्टियों और सरकारों की तुलना में भाजपा और भाजपा सरकारों में थोड़ा ही सही, लेकिन फर्क तो जरूर है। यही फर्क उसे स्वप्न को साकार करने का जज्बा, उर्जा और कौशल देता है। भाजपा के पास आज भी प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है। सैकड़ों समविचारी संगठनों का सहयोग और उर्जा है। अगर शिवराज सरकार ने पार्टी के कार्यकर्ताओं और समविचारी संगठनों की उर्जा और कौशल का उपयोग किया तो स्वर्णिम मध्यप्रदेश का स्वप्न साकार होने में देर नहीं लगेगी।
शिवराज सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में भी विभिन्न पंचायतों के माध्यम से जनमत का आगाज किया था। इस कार्यकाल में भी प्रदेश के मुखिया ने पंचों को मंच देने का सिलसिला जारी रखा है। वे जानते हैं पंच ही परमेश्वर है। भाजपा सरकार हकदारों को सुनना चाहती है, जिनका हक है उनसे दो बातें करना चाहती है। मुख्यमंत्री की चैपाल में पंचायत का आयोजन सबको सुनने का एक उपक्रम है। लेकिन सुने हुए को गुना जाए और गुने हुए को वापस सब तक पहुचाया जाए, यह जनता-जनार्दन की अपेक्षा है। महिला पंचायत, किसान पंचायत, जनजाति (आदिवासी) पंचायत, वन पंचायत, अनुसूचित जाति पंचायत, कोटवार पंचायत, खेल पंचायत, लघु उद्योग पंचायत तथा कारीगर-शिल्पी पंचायत, किसान महापंचायत, निःशक्तजन पंचायत, मछुआ पंचायत, स्व-सहायता समूह पंचायत, हम्माल-तुलावट पंचायत और रिक्शा-ठेला चालक पंचायत के बाद इस एनजीओ पंचायत के अपने मायने हैं। इसके बाद कामकाजी महिलाओं की पंचायत भी की जा रही है।
यह पंचायत पूर्व में आयोजित पंचायतों से कई मायनों में भिन्न है। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि मध्यप्रदेश ही नहीं, देश और दुनियाभर में सार्वजनिक और निजी (सेक्टर) क्षेत्र की तरह एनजीओ सेक्टर का भी विस्तार हुआ है। पूर्व में आयोजित विभिन्न पंचायतों के बरक्स, राजनीति और वैचारिक क्षेत्र में एनजीओ सेक्टर का उन सबसे अधिक दखल और प्रभाव है। प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एनजीओ की अलग किस्म की राजनीति है। एनजीओ के अनेक समूहों का न सिर्फ सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में दखल है, बल्कि वे देश और दुनिया की राजनीति को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित करते हैं। आज कुकुरमुत्ते की तरह पनप रहे पनप रहे एनजीओ की चर्चा छोड़ दे ंतो मध्यप्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में स्थापित एनजीओ अपनी-अपनी वैचारिक पृष्ठभूमि के साथ अपने उद्देश्यों को अंजाम देने में लगे हैं। अमेरिका जैसे पूंजीवादी देशों से लेकर सोवियत रूस तक एनजीओ के माध्यम से अपने नियोजित उद्देश्यों को पूरा करते रहे हैं। अनेक सरकारों की खुफिया एजेंसियां भी अपनी विदेश नीति को क्रियान्वित करने में एनजीओ को माध्यम की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं। लगभग सभी बड़ी रानीतिक पार्टियों ने एनजीओ प्रकोष्ठ की स्थापना कर रखी है। लेकिन अभी इस क्षेत्र में वाम राजनीति का एकछत्र कब्जा है। शिक्षा, शोध, मानवाधिकार, गरीबी, सूचना और ऐसे लगभग सभी क्षेत्रों में वाम राजनीति ने एनजीओ के माध्यम से अपना दखल और रूतबा बनाए रखा है। आज तक देशभर में माक्र्सवाद, लेनिनवाद, माओवाद और कुल मिलाकर वाम (कम्युनिस्ट) राजनीति को स्थापित करने, उसे विस्तार देने में एनजीओ को एक उपकरण की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है। भारत में एनजीओ सेक्टर अपेक्षाकृत नया और कच्चा है। इस लिए अभी से इस दिशा में जागरुक, सचेत और सावधानी पूर्वक पहल व प्रयोग की दरकार है।
मध्यप्रदेश में जन अभियान परिषद् के रूप में एक अभिनव प्रयोग हुआ है। स्वैच्छिक संस्थाओं को संस्कार और प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त करने का प्रयास भले ही दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में शुरु हुआ, लकिन तब तक यह सुप्तावस्था में ही था। भाजपा सरकार ने पहली बार इस दिशा में एक सार्थक और सकारात्मक पहल की। भारत सरकार का योजना विभाग, योजना आयोग के माध्यम से इस दिशा में सक्रिय प्रयोग कर रहा है। इस प्रयोग के परिणाम भी आने लगे हैं। मध्यप्रदेश सरकार की पहल को और अधिक सक्रियता की दरकार है। जन अभियान परिषद् को कार्य करते हुए दशक बीत गए, लेकिन अभी तक कोई उल्लेखनीय परिणाम नहीं दिखा। अच्छे बजट और भारी-भरकम अमले के बावजूद जन अभियान परिषद् का कार्य-निष्पादन संतोषजनक नहीं है। स्वैच्छिक संस्थाओं और सरकार के बीच नीति, योजना और क्रियान्वयन के स्तर पर अभी बहुत कुछ किया जाना है। संभव है 12 अक्टूबर को आयोजित इस एनजीओ पंचायत में किसी एनजीओ नीति के प्रारूप की घोषणा हो। मुख्यमंत्री चाहें तो जन अभियान परिषद् के बैनर तले एक नीति-निर्माण समिति का गठन भी कर सकते हैं। ग्राम पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक न सिर्फ विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में, बल्कि आम जनता तक सुशासन सुनिश्चित करने में भी एनजीओ की भूमिका तय की जा सकती है।
जब कभी विकास की बात होती है तो उसके साथ विभिन्न ‘‘सिद्धांतों-वादों’’ की चर्चा भी होती है। विकास का चाहे पूंजीवादी, समाजवादी या माक्र्सवादी सिद्धांत हो या हिन्दुत्ववादी सिद्धांत, सबका लक्ष्य व्यक्ति को सुखी और सम्पन्न बनाना है। हिन्दुत्ववादी चिन्तन विशेष रूप से सभी प्रकार के संघर्षों का निषेध करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति को प्राथमिकता देता है। यह विविधताओं और श्रेष्ठताओं को सहज स्वीकार करता है। गांधी, लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय का विकास चिन्तन इसी हिन्दुत्व से प्रेरित और पोषित है। भारतीय समाज ने इसे सहज स्वीकार किया है। लेकिन माक्र्सवादी, माओवादी और लेनिनवादी अपने विकास सिद्धांतों को जबरन थोपने की कोशिश कर रहे हैं, जो न माने उसे हथियारों का भय दिखाने और भयभीत न होने वालों को खत्म कर देने का खूनी खेल हैं। भाजपा और भाजपा सरकार के मुखिया गाहे-बगाहे हिन्दुत्व, एकात्ममानववाद, अन्त्योदय और सर्वोदय की चर्चा करते ही रहे हैं। सर्वे भवन्तु सुखिनः की कल्पना साकार करने में प्रदेश के हजारों स्वैच्छिक संगठन समाज के प्रतिनिधि के तौर पर सरकार की मदद के लिए आगे आ सकते हैं। बशर्ते वे प्रशिक्षित और संस्कारित किए जाएं। प्रदेश के स्थापित एनजीओ स्वयं के प्रशिक्षण और संस्कार का विरोध भी कर सकते हैं। उन्हें अपने प्रशिक्षण और संस्कार का गुमान भी है। सरकार का राजधर्म तो यही है कि नये-पुराने, छोटे-बड़े सभी को साथ लेकर चले। वैचारिक अंतरद्र्वन्दों के बीच आपसी समन्वय स्थापित हो। प्रदेश की स्वैच्छिक संस्थाएं अपने शासकीय मुखिया के साथ कदम मिलाने, साथ चलने की चेष्टा करें तो ही बीमारू मध्यप्रदेश, स्वस्थ होकर स्वर्णिम प्रदेश बन सकेगा। यही स्वर्णिम प्रदेश, परम वैभवशाली राष्ट्र के लिए देश का नेतृत्व कर सकेगा। स्वर्णिम मध्यप्रदेश की चाह, कांग्रेस के गरीबी हटाओ और अनुशासन लाओ के नारे की तरह न हो जाए, इसलिए प्रदेश के विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता विकसित करने की जरूरत है। इस दृष्टि से निश्चित ही इस एनजीओ पंचायत के मायने हैं। यह पंचायत इस आर्षवाणी की साक्षी बनेगी -
समानो मन्त्रः समितिः समानी
समानं मनः सहिचित्तमेषाम्।
समानं मन्त्रमिभिमन्त्रये वः
समानने दो हविषा जुहोमि।।
अर्थात् मिलकर कार्य करने वालों का मन्त्र समान होता है, ये परस्पर मंत्रणा करके एक निर्णय पर पहंुचते हैं, चित्तसहित इनका मन समान होता है। मैं तुम्हे मिलकर समान निष्कर्ष पर पहंुचने की प्रेरणा देता हूं। यह एनजीओ पंचायत स्वर्णिम मध्यप्रदेश के लिए प्रदेश के मुखिया द्वारा समन्वय और उर्जा संचय का एक आह्वान भी है।
(लेखक सामाजिक कार्यकर्ता हैं।)
ई-31, 45 बंगले, भोपाल
12 अक्टूबर को प्रदेश की राजधानी भोपाल में एनजीओ पंचायत आहूत की गई है। पहले यह पंचायत 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन किया जाना था। सरकार ने गांधीजी से संबंधित दिवस पर एनजीओ पंचायत कर कुछ विशेष संदेश देने की सोची होगी। लेकिन किन्ही कारणों से यह पंचायत अब 12 अक्टूबर को की जा रही है। दिवस चाहे कोई भी हो, इस पंचायत का पूर्व नियोजित कोई उद्देश्य अवश्य होगा। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चैहान ने ‘‘स्वर्णिम मध्यप्रदेश’’ का नारा दिया है। सरकार ने 2013 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उल्लेखनीय है कि सिर्फ भाजपा सरकार ही नहीं, संपूर्ण भाजपा और कहें तो संपूर्ण राष्ट्रवादी शक्तियों की यही अभीप्सा है - परम् वैभवम् नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्’ अर्थात् अपने देश को परम वैभव के शिखर तक ले जाना है। राष्ट्र के परम वैभव का सपना तभी सकार होगा जब एक-एक प्रदेश परम् वैभव की ओर अग्रसर होगा।
स्वप्न का संबंध स्वप्नद्रष्ट्रा से भी है। स्वप्न तो कोई भी देख सकता है, लेकिन उसे साकार वहीं कर सकता है जो कुशल योजनाकार और रणनीतिकार हो। स्वप्न को नीति, योजना और रणनीति दिए बिना साकार करना संभव नहीं है। आजादी के बाद अनेक पार्टियों और सरकारों ने सुखद स्वप्न देखे। लेकिन ये स्वप्न नारों में तब्दिल होकर रह गए। क्या भाजपा सरकार के मुखिया शिवराज का स्वप्न भी नारे में तब्दील होकर रह जायेगा! अन्य पार्टियों और सरकारों की तुलना में भाजपा और भाजपा सरकारों में थोड़ा ही सही, लेकिन फर्क तो जरूर है। यही फर्क उसे स्वप्न को साकार करने का जज्बा, उर्जा और कौशल देता है। भाजपा के पास आज भी प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है। सैकड़ों समविचारी संगठनों का सहयोग और उर्जा है। अगर शिवराज सरकार ने पार्टी के कार्यकर्ताओं और समविचारी संगठनों की उर्जा और कौशल का उपयोग किया तो स्वर्णिम मध्यप्रदेश का स्वप्न साकार होने में देर नहीं लगेगी।
शिवराज सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में भी विभिन्न पंचायतों के माध्यम से जनमत का आगाज किया था। इस कार्यकाल में भी प्रदेश के मुखिया ने पंचों को मंच देने का सिलसिला जारी रखा है। वे जानते हैं पंच ही परमेश्वर है। भाजपा सरकार हकदारों को सुनना चाहती है, जिनका हक है उनसे दो बातें करना चाहती है। मुख्यमंत्री की चैपाल में पंचायत का आयोजन सबको सुनने का एक उपक्रम है। लेकिन सुने हुए को गुना जाए और गुने हुए को वापस सब तक पहुचाया जाए, यह जनता-जनार्दन की अपेक्षा है। महिला पंचायत, किसान पंचायत, जनजाति (आदिवासी) पंचायत, वन पंचायत, अनुसूचित जाति पंचायत, कोटवार पंचायत, खेल पंचायत, लघु उद्योग पंचायत तथा कारीगर-शिल्पी पंचायत, किसान महापंचायत, निःशक्तजन पंचायत, मछुआ पंचायत, स्व-सहायता समूह पंचायत, हम्माल-तुलावट पंचायत और रिक्शा-ठेला चालक पंचायत के बाद इस एनजीओ पंचायत के अपने मायने हैं। इसके बाद कामकाजी महिलाओं की पंचायत भी की जा रही है।
यह पंचायत पूर्व में आयोजित पंचायतों से कई मायनों में भिन्न है। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि मध्यप्रदेश ही नहीं, देश और दुनियाभर में सार्वजनिक और निजी (सेक्टर) क्षेत्र की तरह एनजीओ सेक्टर का भी विस्तार हुआ है। पूर्व में आयोजित विभिन्न पंचायतों के बरक्स, राजनीति और वैचारिक क्षेत्र में एनजीओ सेक्टर का उन सबसे अधिक दखल और प्रभाव है। प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एनजीओ की अलग किस्म की राजनीति है। एनजीओ के अनेक समूहों का न सिर्फ सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में दखल है, बल्कि वे देश और दुनिया की राजनीति को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित करते हैं। आज कुकुरमुत्ते की तरह पनप रहे पनप रहे एनजीओ की चर्चा छोड़ दे ंतो मध्यप्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में स्थापित एनजीओ अपनी-अपनी वैचारिक पृष्ठभूमि के साथ अपने उद्देश्यों को अंजाम देने में लगे हैं। अमेरिका जैसे पूंजीवादी देशों से लेकर सोवियत रूस तक एनजीओ के माध्यम से अपने नियोजित उद्देश्यों को पूरा करते रहे हैं। अनेक सरकारों की खुफिया एजेंसियां भी अपनी विदेश नीति को क्रियान्वित करने में एनजीओ को माध्यम की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं। लगभग सभी बड़ी रानीतिक पार्टियों ने एनजीओ प्रकोष्ठ की स्थापना कर रखी है। लेकिन अभी इस क्षेत्र में वाम राजनीति का एकछत्र कब्जा है। शिक्षा, शोध, मानवाधिकार, गरीबी, सूचना और ऐसे लगभग सभी क्षेत्रों में वाम राजनीति ने एनजीओ के माध्यम से अपना दखल और रूतबा बनाए रखा है। आज तक देशभर में माक्र्सवाद, लेनिनवाद, माओवाद और कुल मिलाकर वाम (कम्युनिस्ट) राजनीति को स्थापित करने, उसे विस्तार देने में एनजीओ को एक उपकरण की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है। भारत में एनजीओ सेक्टर अपेक्षाकृत नया और कच्चा है। इस लिए अभी से इस दिशा में जागरुक, सचेत और सावधानी पूर्वक पहल व प्रयोग की दरकार है।
मध्यप्रदेश में जन अभियान परिषद् के रूप में एक अभिनव प्रयोग हुआ है। स्वैच्छिक संस्थाओं को संस्कार और प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त करने का प्रयास भले ही दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में शुरु हुआ, लकिन तब तक यह सुप्तावस्था में ही था। भाजपा सरकार ने पहली बार इस दिशा में एक सार्थक और सकारात्मक पहल की। भारत सरकार का योजना विभाग, योजना आयोग के माध्यम से इस दिशा में सक्रिय प्रयोग कर रहा है। इस प्रयोग के परिणाम भी आने लगे हैं। मध्यप्रदेश सरकार की पहल को और अधिक सक्रियता की दरकार है। जन अभियान परिषद् को कार्य करते हुए दशक बीत गए, लेकिन अभी तक कोई उल्लेखनीय परिणाम नहीं दिखा। अच्छे बजट और भारी-भरकम अमले के बावजूद जन अभियान परिषद् का कार्य-निष्पादन संतोषजनक नहीं है। स्वैच्छिक संस्थाओं और सरकार के बीच नीति, योजना और क्रियान्वयन के स्तर पर अभी बहुत कुछ किया जाना है। संभव है 12 अक्टूबर को आयोजित इस एनजीओ पंचायत में किसी एनजीओ नीति के प्रारूप की घोषणा हो। मुख्यमंत्री चाहें तो जन अभियान परिषद् के बैनर तले एक नीति-निर्माण समिति का गठन भी कर सकते हैं। ग्राम पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक न सिर्फ विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में, बल्कि आम जनता तक सुशासन सुनिश्चित करने में भी एनजीओ की भूमिका तय की जा सकती है।
जब कभी विकास की बात होती है तो उसके साथ विभिन्न ‘‘सिद्धांतों-वादों’’ की चर्चा भी होती है। विकास का चाहे पूंजीवादी, समाजवादी या माक्र्सवादी सिद्धांत हो या हिन्दुत्ववादी सिद्धांत, सबका लक्ष्य व्यक्ति को सुखी और सम्पन्न बनाना है। हिन्दुत्ववादी चिन्तन विशेष रूप से सभी प्रकार के संघर्षों का निषेध करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति को प्राथमिकता देता है। यह विविधताओं और श्रेष्ठताओं को सहज स्वीकार करता है। गांधी, लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय का विकास चिन्तन इसी हिन्दुत्व से प्रेरित और पोषित है। भारतीय समाज ने इसे सहज स्वीकार किया है। लेकिन माक्र्सवादी, माओवादी और लेनिनवादी अपने विकास सिद्धांतों को जबरन थोपने की कोशिश कर रहे हैं, जो न माने उसे हथियारों का भय दिखाने और भयभीत न होने वालों को खत्म कर देने का खूनी खेल हैं। भाजपा और भाजपा सरकार के मुखिया गाहे-बगाहे हिन्दुत्व, एकात्ममानववाद, अन्त्योदय और सर्वोदय की चर्चा करते ही रहे हैं। सर्वे भवन्तु सुखिनः की कल्पना साकार करने में प्रदेश के हजारों स्वैच्छिक संगठन समाज के प्रतिनिधि के तौर पर सरकार की मदद के लिए आगे आ सकते हैं। बशर्ते वे प्रशिक्षित और संस्कारित किए जाएं। प्रदेश के स्थापित एनजीओ स्वयं के प्रशिक्षण और संस्कार का विरोध भी कर सकते हैं। उन्हें अपने प्रशिक्षण और संस्कार का गुमान भी है। सरकार का राजधर्म तो यही है कि नये-पुराने, छोटे-बड़े सभी को साथ लेकर चले। वैचारिक अंतरद्र्वन्दों के बीच आपसी समन्वय स्थापित हो। प्रदेश की स्वैच्छिक संस्थाएं अपने शासकीय मुखिया के साथ कदम मिलाने, साथ चलने की चेष्टा करें तो ही बीमारू मध्यप्रदेश, स्वस्थ होकर स्वर्णिम प्रदेश बन सकेगा। यही स्वर्णिम प्रदेश, परम वैभवशाली राष्ट्र के लिए देश का नेतृत्व कर सकेगा। स्वर्णिम मध्यप्रदेश की चाह, कांग्रेस के गरीबी हटाओ और अनुशासन लाओ के नारे की तरह न हो जाए, इसलिए प्रदेश के विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता विकसित करने की जरूरत है। इस दृष्टि से निश्चित ही इस एनजीओ पंचायत के मायने हैं। यह पंचायत इस आर्षवाणी की साक्षी बनेगी -
समानो मन्त्रः समितिः समानी
समानं मनः सहिचित्तमेषाम्।
समानं मन्त्रमिभिमन्त्रये वः
समानने दो हविषा जुहोमि।।
अर्थात् मिलकर कार्य करने वालों का मन्त्र समान होता है, ये परस्पर मंत्रणा करके एक निर्णय पर पहंुचते हैं, चित्तसहित इनका मन समान होता है। मैं तुम्हे मिलकर समान निष्कर्ष पर पहंुचने की प्रेरणा देता हूं। यह एनजीओ पंचायत स्वर्णिम मध्यप्रदेश के लिए प्रदेश के मुखिया द्वारा समन्वय और उर्जा संचय का एक आह्वान भी है।
(लेखक सामाजिक कार्यकर्ता हैं।)
ई-31, 45 बंगले, भोपाल
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2009
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
ऊँ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
’’समिधा‘‘ संघ कार्यालय, ई-2/187, महावीर नगर, भोपाल-462016
दूरभाष-07ःः7241004, फैक्स-07ःः-2421055, अणुडाक-ोेनकंतेींद2009/तमकपििउंपसण्बवउ
कुप्. सी. सुदर्षन
तिथि: कार्तिक कृष्ण 2 ईसवी दिनांक 06.10.2009
कलियुग-5111 पटना, बिहार
आज पटना पहुंचते ही यह अति दुःखद समाचार मिला कि हमारे वरिष्ठ प्रचारक श्री प्यारेलाल जी खण्डेलवाल हम सबको छोड़कर परमधाम सिधार गये। सन् 1948 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगे प्रथम प्रतिबंध के समय संघ कार्य पर आए संकट को दूर करने और आगे उसकी अभिवृद्धि के लिए जिन प्रचारकों ने अपना जीवन लगाने का संकल्प किया उनमें श्री प्यारेलाल जी भी एक थे। इंदौर नगर के प्रचारक के रुप में कार्यारम्भ कर उन्होंने जिला, विभाग ऐसे अनेक दायित्व सम्हाले और सन् 1964 में जनसंघ की मध्यप्रदेष इकाई में उनकी योग्यता हुई। तब से कुछ वर्षों पूर्व तक उन्होंने राजनैतिक क्षेत्र में अपनी सेवाएं समर्पित की।
पहल जनसंघ और बाद में आपातकाल के पश्चात् भारतीय जनता पार्टी में न एक कर्मठ, निरलस, अकुतोभय एवं कुषल संगठन के रुप में विख्यात रहे। आज की मूल्यविहीन राजनीति में जिन कुछ लोगों ने आचरण का आदर्ष प्रस्तुत किया उनमें श्री प्यारेलाल जी भी एक रहे। मूल्यों से उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। सन् 1989 मे लोकसभा सदस्य के रुप में निर्वाचित होकर ढ़ाई वर्ष तक लोकसभा में तथा सन् 1998 से लेकर जब तक राज्यसभा में उन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया।
गत तीन वर्षों से वे बीमार चल रहे थे। बीच में अ.भा.आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती रहे तथा हम लोगों में से अनेक उनसे मिलने भी गये थे। अपनी प्रवास इच्छा-षक्ति के बल पर वे रोगों से जूझते रहे। शारीरिक दुर्बलता के बाद भी उन्हें कार्य की सतत चिन्ता रहा करती थी, यहां तक कि अस्वस्थ होते हुये भी 29 जुलाई 2009 केा दिल्ली में स्वयंसेवक सांसदों के श्री गुरुदक्षिणा उत्सव के कार्यक्रम में वे सम्मिलित हुये। इतने वर्षों के उनके सार्वजनिक जीवन में समाज का जो बहुत बड़ा वर्ग जो उनके सम्पर्क में आया था उन सबका शोक संतप्त होना स्वाभाविक है। पर नियति के आगे किसी का बस नहीं चलता और वे हम सबको छोड़ गये।
दिनांक 07 अक्टूबर से राजगीर में प्रारंभ हो रही अ.भा.कार्यकारी मंडल की बैठक के पूर्व संघ के केन्द्रीय पदाधिकारियों की यह बैठक श्री प्यारेलालजी के बड़े भाई श्री गुलाबचन्द खण्डेलवाल, उनके परिवारजनों तथा स्नेहीजनों एवं सहयोगियों के शोक में सहभागी होतु हुये स्व. श्री प्यारेलालजी को अश्रुपूर्ण श्रद्धाजंलि अर्पित करती हैं।
ऊँ पूर्णमदःपूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावषिष्यते।
ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः
अपठित हस्ताक्षर सहित केन्द्रीय पदाधिकारियों की सूची -
सरसंघचालक - पू. श्री मोहनराव भागवत
सरकार्यवाह - मा. श्री भैयाजी जोषी
सह सरकार्यवाह - मा. सुरेषजी सोनी
सह सरकार्यवाह - मा. दत्तात्रय होसबाले
अ.भा. बौद्धिक प्रमुख - मा. भागय्या जी
अ.भा. शारीरिक प्रमुख - मा. कण्णन जी
अ.भा. प्रचार प्रमुख - मा. मनमोहनजी
अ.भा. सह सेवा प्रमुख - मा. सुहास हिरेमठ
अ.भा. प्रचारक प्रमुख - मा. मदनदासजी
अ.भा. सह प्रचारक प्रमुख - मा. श्रीकृष्णजी मोतलग
अ.भा. कार्यकारिणी सदस्य - मा. इंदे्रषजी
निवृत्त सरसंघचालक - मा. सुदर्षनजी
अ.भा. कार्यकारिणी सदस्य - मा. मधुभाई कुलकर्णी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
’’समिधा‘‘ संघ कार्यालय, ई-2/187, महावीर नगर, भोपाल-462016
दूरभाष-07ःः7241004, फैक्स-07ःः-2421055, अणुडाक-ोेनकंतेींद2009/तमकपििउंपसण्बवउ
कुप्. सी. सुदर्षन
तिथि: कार्तिक कृष्ण 2 ईसवी दिनांक 06.10.2009
कलियुग-5111 पटना, बिहार
आज पटना पहुंचते ही यह अति दुःखद समाचार मिला कि हमारे वरिष्ठ प्रचारक श्री प्यारेलाल जी खण्डेलवाल हम सबको छोड़कर परमधाम सिधार गये। सन् 1948 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगे प्रथम प्रतिबंध के समय संघ कार्य पर आए संकट को दूर करने और आगे उसकी अभिवृद्धि के लिए जिन प्रचारकों ने अपना जीवन लगाने का संकल्प किया उनमें श्री प्यारेलाल जी भी एक थे। इंदौर नगर के प्रचारक के रुप में कार्यारम्भ कर उन्होंने जिला, विभाग ऐसे अनेक दायित्व सम्हाले और सन् 1964 में जनसंघ की मध्यप्रदेष इकाई में उनकी योग्यता हुई। तब से कुछ वर्षों पूर्व तक उन्होंने राजनैतिक क्षेत्र में अपनी सेवाएं समर्पित की।
पहल जनसंघ और बाद में आपातकाल के पश्चात् भारतीय जनता पार्टी में न एक कर्मठ, निरलस, अकुतोभय एवं कुषल संगठन के रुप में विख्यात रहे। आज की मूल्यविहीन राजनीति में जिन कुछ लोगों ने आचरण का आदर्ष प्रस्तुत किया उनमें श्री प्यारेलाल जी भी एक रहे। मूल्यों से उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। सन् 1989 मे लोकसभा सदस्य के रुप में निर्वाचित होकर ढ़ाई वर्ष तक लोकसभा में तथा सन् 1998 से लेकर जब तक राज्यसभा में उन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया।
गत तीन वर्षों से वे बीमार चल रहे थे। बीच में अ.भा.आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती रहे तथा हम लोगों में से अनेक उनसे मिलने भी गये थे। अपनी प्रवास इच्छा-षक्ति के बल पर वे रोगों से जूझते रहे। शारीरिक दुर्बलता के बाद भी उन्हें कार्य की सतत चिन्ता रहा करती थी, यहां तक कि अस्वस्थ होते हुये भी 29 जुलाई 2009 केा दिल्ली में स्वयंसेवक सांसदों के श्री गुरुदक्षिणा उत्सव के कार्यक्रम में वे सम्मिलित हुये। इतने वर्षों के उनके सार्वजनिक जीवन में समाज का जो बहुत बड़ा वर्ग जो उनके सम्पर्क में आया था उन सबका शोक संतप्त होना स्वाभाविक है। पर नियति के आगे किसी का बस नहीं चलता और वे हम सबको छोड़ गये।
दिनांक 07 अक्टूबर से राजगीर में प्रारंभ हो रही अ.भा.कार्यकारी मंडल की बैठक के पूर्व संघ के केन्द्रीय पदाधिकारियों की यह बैठक श्री प्यारेलालजी के बड़े भाई श्री गुलाबचन्द खण्डेलवाल, उनके परिवारजनों तथा स्नेहीजनों एवं सहयोगियों के शोक में सहभागी होतु हुये स्व. श्री प्यारेलालजी को अश्रुपूर्ण श्रद्धाजंलि अर्पित करती हैं।
ऊँ पूर्णमदःपूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावषिष्यते।
ऊँ शांतिः शांतिः शांतिः
अपठित हस्ताक्षर सहित केन्द्रीय पदाधिकारियों की सूची -
सरसंघचालक - पू. श्री मोहनराव भागवत
सरकार्यवाह - मा. श्री भैयाजी जोषी
सह सरकार्यवाह - मा. सुरेषजी सोनी
सह सरकार्यवाह - मा. दत्तात्रय होसबाले
अ.भा. बौद्धिक प्रमुख - मा. भागय्या जी
अ.भा. शारीरिक प्रमुख - मा. कण्णन जी
अ.भा. प्रचार प्रमुख - मा. मनमोहनजी
अ.भा. सह सेवा प्रमुख - मा. सुहास हिरेमठ
अ.भा. प्रचारक प्रमुख - मा. मदनदासजी
अ.भा. सह प्रचारक प्रमुख - मा. श्रीकृष्णजी मोतलग
अ.भा. कार्यकारिणी सदस्य - मा. इंदे्रषजी
निवृत्त सरसंघचालक - मा. सुदर्षनजी
अ.भा. कार्यकारिणी सदस्य - मा. मधुभाई कुलकर्णी
गोवंश के बिना विश्व मंगल की कामना नहीं
गोवंश के बिना विश्व मंगल की कामना नहीं
नादौन 8 october : विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के नादौन स्थित श्रीराम लीला मैदान में वीरवार सुबह नौ बजे पहुंचते ही पंडाल वंदे गो मातरम् के जयघोष से गूंज उठा।समारोह में भारत माता मंदिर हरिद्वार से यात्रा के साथ आए अखिलेश्वरानंद महाराज ने जनसमूह को संबोधित करते कहा कि जो देश आदिकाल से ही गोमाता का पुजारी था। वहां आज गोवंश की निर्मम हत्या की जा रही है जिसके लिए देश के कर्णधार शासकों की नीतियां जिम्मेवार हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे शासकों को न तो गोमाता की महिमा का पता है और न ही परलोक का ज्ञान है। उन्होंने कहा कि जब हमारे बुजुर्ग बूढ़े हो जाते हैं तो क्या हम उनके प्रति श्रद्धा का भाव नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि संपूर्ण गोवंश देश के विकास में काम आता है और इसके बिना भारत तो क्या विश्व के मंगल की कामना करना भी मुश्किल है।
उन्होंने गाय माता के प्रति वचनबद्धता के संकल्प से लोगों को प्रतिज्ञा भी दिलवाई। सभी लोगों से गाय को माता मानकर उसे सम्मान देने का आह्वान किया गया। समारोह यात्रा के प्रदेशाध्यक्ष महंत सूर्यनाथ ने कहा कि माता नाम ही ऐसा है जिसमें करुणा बसी है। सूर्यनाथ ने कहा कि जब-जब भी गोवंश का सम्मान हुआ भारत सोने की चिड़िया कहलाया।
इस अवसर पर दंगड़ी मठ के संत श्रीमद भक्ति प्रसाद विष्णु महाराज भी उपस्थित थे। समारोह में गोशाला भड़ाली भगोर के संस्थापक सुखदेव शास्त्री तथा भदरूं गोशाला के संयोजक पाधा मंशा राम को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर श्रीनिवास मूर्ति, कैलाश, वेद प्रकाश, विवेक, सोहन सिंह, विजय अग्निहोत्री, राजकुमार शर्मा, किशोर शर्मा, सुभाष, अजय सौंधी, जसवीर सिंह, दिनेश, प्रमोद कपिल, त्रिभुवन सिंह आदि उपस्थित थे।
गाय में समाहित हैं सभी शास्त्र – स्वामी अखिलेश्वरानंद
पठाणकोट, अक्तूबर ७ – गाय भारतीय समाज – जीवन के सभी पहलुओं को स्पर्श और प्रभावित करती है । गाय में अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, चिकित्साशास्त्र का समावेश है । यह कहना है स्वामी अखिलेश्वरानंद का । स्वामी जी विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के स्वागत के लिए पठाणकोट में आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे ।
स्वामी जी ने कहा कि गाय अपने आप में एक संपूर्ण विज्ञान है । गोमूत्र सभी रोगों की रामबाण औषधि है । यह संपूर्ण शरीर का शोधन करके रोगों का नाश करता है । उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रों में गोविज्ञान की बात कही गयी है । गाय का दूध, मूत्र, गोबर आर्थिक विकास में उपयोगी है और वैज्ञानिक कसौटी पर भी खरे उतरे हैं । उन्होंने कहा कि गाय को अपने जीवन से दूर करन के कारण ही पंजाब की समृद्धि में कमी आयी है ।
इससे पहले कठुआ में आयोजित स्वागत सभा में बोलते हुए गो विज्ञान अनुसंधान केन्द्र के सुरेश धवन ने गाय की उपयोगिता और पंचगव्य को लेकर हुए आधुनिक शोधों के बारे में जानकारी दी । उन्होंने कहा कि बाजार में उपलब्ध घी बनाने की प्रक्रिया दोषपूर्ण है । बाजारु घी स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है । जबकि ठीक प्रकार से बनाया गया गाय का घी हृदयरोगियों के लिए भि लाभदायक है ।
यात्रा को जम्मू से हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करने पर नूरपुर में यात्रा का भव्य स्वागत किया गया । कांगडा में आयोजित स्वागत सभा में बोलते हुए ज्वाला देवी मंदिर के स्वामी सूर्यनाथ ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पं. जवाहर लाल नेहरु और उनके समर्थकों के कारण गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाला प्रस्ताव संसद में पारित नही हो सका । उन्होंने गोशालाओं में सुधार करने की भी बात कही ।
गोकर्णा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य राघवेश्वर भारती ने आंकडो का हवाला देते हुए कहा कि १९४७ में एक हजार भारतीयों पर ४३० गोवंश उपलब्ध थे । २००१ में यह आंकडा घटकर ११० हो गयी । और २०११ में यह आंकडा घटकर २० गोवंश प्रति एक हजार व्यक्ति हो जाने का अनुमान है ।
उन्होंने कहा कि गोमाता की रक्षा करके ही भारतमाता और प्रकृति माता की रक्षा की जा सकती है ।
फिल्म अभिनेता सुरेश ओबेराय ने अपना व्यक्तिगत अनुभव बताते हुए कहा कि गोदुग्ध के सेवन से उनके पूरे परिवार में प्यार का माहौल बन गया है । उन्होंने कहा कि गोवंश के महत्व को तार्किक रूप से समझने की आवश्यकता है ।
विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा अब मैदानी हिस्से छोडकर पहाडी क्षेत्रों में प्रवेश कर चुकी है । लेकिन यात्रा के स्वागत कार्यक्रमों और जनसमुदाय की भागीदारी में कोई कमी नहीं आयी है
नादौन 8 october : विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के नादौन स्थित श्रीराम लीला मैदान में वीरवार सुबह नौ बजे पहुंचते ही पंडाल वंदे गो मातरम् के जयघोष से गूंज उठा।समारोह में भारत माता मंदिर हरिद्वार से यात्रा के साथ आए अखिलेश्वरानंद महाराज ने जनसमूह को संबोधित करते कहा कि जो देश आदिकाल से ही गोमाता का पुजारी था। वहां आज गोवंश की निर्मम हत्या की जा रही है जिसके लिए देश के कर्णधार शासकों की नीतियां जिम्मेवार हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे शासकों को न तो गोमाता की महिमा का पता है और न ही परलोक का ज्ञान है। उन्होंने कहा कि जब हमारे बुजुर्ग बूढ़े हो जाते हैं तो क्या हम उनके प्रति श्रद्धा का भाव नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि संपूर्ण गोवंश देश के विकास में काम आता है और इसके बिना भारत तो क्या विश्व के मंगल की कामना करना भी मुश्किल है।
उन्होंने गाय माता के प्रति वचनबद्धता के संकल्प से लोगों को प्रतिज्ञा भी दिलवाई। सभी लोगों से गाय को माता मानकर उसे सम्मान देने का आह्वान किया गया। समारोह यात्रा के प्रदेशाध्यक्ष महंत सूर्यनाथ ने कहा कि माता नाम ही ऐसा है जिसमें करुणा बसी है। सूर्यनाथ ने कहा कि जब-जब भी गोवंश का सम्मान हुआ भारत सोने की चिड़िया कहलाया।
इस अवसर पर दंगड़ी मठ के संत श्रीमद भक्ति प्रसाद विष्णु महाराज भी उपस्थित थे। समारोह में गोशाला भड़ाली भगोर के संस्थापक सुखदेव शास्त्री तथा भदरूं गोशाला के संयोजक पाधा मंशा राम को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर श्रीनिवास मूर्ति, कैलाश, वेद प्रकाश, विवेक, सोहन सिंह, विजय अग्निहोत्री, राजकुमार शर्मा, किशोर शर्मा, सुभाष, अजय सौंधी, जसवीर सिंह, दिनेश, प्रमोद कपिल, त्रिभुवन सिंह आदि उपस्थित थे।
गाय में समाहित हैं सभी शास्त्र – स्वामी अखिलेश्वरानंद
पठाणकोट, अक्तूबर ७ – गाय भारतीय समाज – जीवन के सभी पहलुओं को स्पर्श और प्रभावित करती है । गाय में अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, चिकित्साशास्त्र का समावेश है । यह कहना है स्वामी अखिलेश्वरानंद का । स्वामी जी विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के स्वागत के लिए पठाणकोट में आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे ।
स्वामी जी ने कहा कि गाय अपने आप में एक संपूर्ण विज्ञान है । गोमूत्र सभी रोगों की रामबाण औषधि है । यह संपूर्ण शरीर का शोधन करके रोगों का नाश करता है । उन्होंने कहा कि भारतीय शास्त्रों में गोविज्ञान की बात कही गयी है । गाय का दूध, मूत्र, गोबर आर्थिक विकास में उपयोगी है और वैज्ञानिक कसौटी पर भी खरे उतरे हैं । उन्होंने कहा कि गाय को अपने जीवन से दूर करन के कारण ही पंजाब की समृद्धि में कमी आयी है ।
इससे पहले कठुआ में आयोजित स्वागत सभा में बोलते हुए गो विज्ञान अनुसंधान केन्द्र के सुरेश धवन ने गाय की उपयोगिता और पंचगव्य को लेकर हुए आधुनिक शोधों के बारे में जानकारी दी । उन्होंने कहा कि बाजार में उपलब्ध घी बनाने की प्रक्रिया दोषपूर्ण है । बाजारु घी स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है । जबकि ठीक प्रकार से बनाया गया गाय का घी हृदयरोगियों के लिए भि लाभदायक है ।
यात्रा को जम्मू से हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करने पर नूरपुर में यात्रा का भव्य स्वागत किया गया । कांगडा में आयोजित स्वागत सभा में बोलते हुए ज्वाला देवी मंदिर के स्वामी सूर्यनाथ ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पं. जवाहर लाल नेहरु और उनके समर्थकों के कारण गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाला प्रस्ताव संसद में पारित नही हो सका । उन्होंने गोशालाओं में सुधार करने की भी बात कही ।
गोकर्णा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य राघवेश्वर भारती ने आंकडो का हवाला देते हुए कहा कि १९४७ में एक हजार भारतीयों पर ४३० गोवंश उपलब्ध थे । २००१ में यह आंकडा घटकर ११० हो गयी । और २०११ में यह आंकडा घटकर २० गोवंश प्रति एक हजार व्यक्ति हो जाने का अनुमान है ।
उन्होंने कहा कि गोमाता की रक्षा करके ही भारतमाता और प्रकृति माता की रक्षा की जा सकती है ।
फिल्म अभिनेता सुरेश ओबेराय ने अपना व्यक्तिगत अनुभव बताते हुए कहा कि गोदुग्ध के सेवन से उनके पूरे परिवार में प्यार का माहौल बन गया है । उन्होंने कहा कि गोवंश के महत्व को तार्किक रूप से समझने की आवश्यकता है ।
विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा अब मैदानी हिस्से छोडकर पहाडी क्षेत्रों में प्रवेश कर चुकी है । लेकिन यात्रा के स्वागत कार्यक्रमों और जनसमुदाय की भागीदारी में कोई कमी नहीं आयी है
वंदेमातरम कहने से सहमत नहीं
सहारनपुर। दारुल उलूम देवबंद को लेकर जमीयत उलेमा द्वारा आयोजित जलसे में वक्ताओं ने कहा कि इस देश का मुसलमान राष्ट्रगान का सम्मान करता है। खुदा के अलावा किसी और को सजदा इस्लाम में जायज न होने के कारण धार्मिक तौर पर वंदेमातरम कहने से सहमत नहीं हैं। इसलिए देश के लिए तो जान दे सकते हैं परंतु वंदेमातरम नहीं कह सकते।
इस्लामिया इंटर कालेज की मस्जिद में आयोजित जलसे में वक्ताओं ने कहा कि दारुल उलूम देवबंद का मकसद कुरान व इस्लाम की तालीम देना रहा है। देश की आजादी में इस संस्था का योगदान रहा है। जमीयतुल उलेमा के अध्यक्ष मौलवी जहूर अहमद ने कहा कि जिन लोगों ने दारुल उलूम का पुतला जलाया उनके कार्य से राजद्रोह की बू आ रही है। उनका यह कार्य न केवल असंवैधानिक बल्कि अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने वंदेमातरम का सहारा लेकर समाज को बांटने और सांप्रदायिकता फैलाने का काम किया है। वतन से मोहब्बत नबी का फरमान है इसलिए वे देश से प्यार करते हैं और राष्ट्रगान का सम्मान करते हैं। जलसे के बाद में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सीओ को ज्ञापन दिया।
इस्लामिया इंटर कालेज की मस्जिद में आयोजित जलसे में वक्ताओं ने कहा कि दारुल उलूम देवबंद का मकसद कुरान व इस्लाम की तालीम देना रहा है। देश की आजादी में इस संस्था का योगदान रहा है। जमीयतुल उलेमा के अध्यक्ष मौलवी जहूर अहमद ने कहा कि जिन लोगों ने दारुल उलूम का पुतला जलाया उनके कार्य से राजद्रोह की बू आ रही है। उनका यह कार्य न केवल असंवैधानिक बल्कि अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने वंदेमातरम का सहारा लेकर समाज को बांटने और सांप्रदायिकता फैलाने का काम किया है। वतन से मोहब्बत नबी का फरमान है इसलिए वे देश से प्यार करते हैं और राष्ट्रगान का सम्मान करते हैं। जलसे के बाद में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सीओ को ज्ञापन दिया।
मंगलवार, 29 सितंबर 2009
सैकड़ों स्वयंसेवकों की उपस्थिति में स्व. श्री नरेश मोटवानी को अंतिम विदाई
विश्व संवाद केन्द्र
100/45, शिवाजी नगर, भोपाल
0755-2763768, 0-9425008648
दिनांक 29.09.2009
भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निवर्तमान सरसंघचालक श्री कुप्. सी. सुदर्शन की उपस्थिति में सैंकड़ों स्वयंसेवकों और समाज के बन्धुओं ने स्व. श्री नेरश मोटवानी को अंतिम विदाई दी। इस अवसर पर श्री सुदर्शन जी, भोपाल विभाग के संघचालक श्री कांतिलाल चतर, प्रांत सेवा प्रमुख श्री प्रदीप खांडेकर, प्रांत शारीरिक प्रमुख श्री विलास गोळे सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और स्वयंसेवक उपस्थित थे। सेंट्रल सिंधी पंचायत के अध्यक्ष बंसीलाल इसराणी और महासचिव श्री गिरधारी लाल भीखानी, सचिव श्री किशन लाल आशुदानी, लालघाटी सिंधी पंचायत के अध्यक्ष लालचंद ममतानी आदि उपस्थित थे। सभी ने स्व. श्री नरेश मोटवानी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि देते हुए भगवान से प्रार्थना की कि श्री मोटवानी की आत्मा को सदगति दें और उनके परिवार को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
इस अवसर पर पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रांत शारीरिक प्रमुख श्री विलास गोळे ने बताया कि संघ के कार्यकर्ता और स्वयंसेवक पूरी तरह मोटवानी परिवार के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि संघ के कार्यकर्ताओं ने तत्काल उपचार के लिए उन्हें अस्पताल पहुचा कर अपने स्वयंसेवक को बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन हमारा दुर्भाग्य कि हम श्री मोटवानी को बचा नहीं पाए। श्री विलास गोळे ने पुनः दुहराया कि पुलिस-प्रशासन द्वारा की जा रही जांच में हम पूर्ण सहयोग करेंगे और संघ के स्वयंसेवक मोटवानी परिवार की हर संभव सहायता करेंगे।
अंतिम संस्कार में भोपाल के विधायक श्री उमाशंकर गुप्ता, प्रदेष भाजपा उपाध्यक्ष एवं सांसद श्री अनिल दवे, भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह, उपाध्यक्ष श्री विष्णु खत्री, नगर निगम के अध्यक्ष श्री रामदयाल प्रजापति, श्री भगवानदास सबनानी, विश्व हिन्दू परिषद् के श्री बी.एल. तिवारी, श्री देवेन्द्र रावत, राष्ट्रीय सिख संगत के श्री बिहारीलाल,, लघु उद्योग भारतीय के अ.भा. मंत्री श्री जितेन्द्र गुप्ता, प्रज्ञा प्रवाह के श्री दीपक ष्षर्मा, अधिवक्ता परिषद के श्री बी के संाघी साहित्य अकादमी के निदेषक डाॅ देवेन्द्र दीपक,, निराला सृजन पीठ के श्री रामेष्वर मिश्र पंकज सहित अनेक संगठनों के कार्यकर्ता और समाज के वरिष्ठ लोग उपस्थित थे।
100/45, शिवाजी नगर, भोपाल
0755-2763768, 0-9425008648
दिनांक 29.09.2009
भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निवर्तमान सरसंघचालक श्री कुप्. सी. सुदर्शन की उपस्थिति में सैंकड़ों स्वयंसेवकों और समाज के बन्धुओं ने स्व. श्री नेरश मोटवानी को अंतिम विदाई दी। इस अवसर पर श्री सुदर्शन जी, भोपाल विभाग के संघचालक श्री कांतिलाल चतर, प्रांत सेवा प्रमुख श्री प्रदीप खांडेकर, प्रांत शारीरिक प्रमुख श्री विलास गोळे सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और स्वयंसेवक उपस्थित थे। सेंट्रल सिंधी पंचायत के अध्यक्ष बंसीलाल इसराणी और महासचिव श्री गिरधारी लाल भीखानी, सचिव श्री किशन लाल आशुदानी, लालघाटी सिंधी पंचायत के अध्यक्ष लालचंद ममतानी आदि उपस्थित थे। सभी ने स्व. श्री नरेश मोटवानी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि देते हुए भगवान से प्रार्थना की कि श्री मोटवानी की आत्मा को सदगति दें और उनके परिवार को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
इस अवसर पर पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रांत शारीरिक प्रमुख श्री विलास गोळे ने बताया कि संघ के कार्यकर्ता और स्वयंसेवक पूरी तरह मोटवानी परिवार के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि संघ के कार्यकर्ताओं ने तत्काल उपचार के लिए उन्हें अस्पताल पहुचा कर अपने स्वयंसेवक को बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन हमारा दुर्भाग्य कि हम श्री मोटवानी को बचा नहीं पाए। श्री विलास गोळे ने पुनः दुहराया कि पुलिस-प्रशासन द्वारा की जा रही जांच में हम पूर्ण सहयोग करेंगे और संघ के स्वयंसेवक मोटवानी परिवार की हर संभव सहायता करेंगे।
अंतिम संस्कार में भोपाल के विधायक श्री उमाशंकर गुप्ता, प्रदेष भाजपा उपाध्यक्ष एवं सांसद श्री अनिल दवे, भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह, उपाध्यक्ष श्री विष्णु खत्री, नगर निगम के अध्यक्ष श्री रामदयाल प्रजापति, श्री भगवानदास सबनानी, विश्व हिन्दू परिषद् के श्री बी.एल. तिवारी, श्री देवेन्द्र रावत, राष्ट्रीय सिख संगत के श्री बिहारीलाल,, लघु उद्योग भारतीय के अ.भा. मंत्री श्री जितेन्द्र गुप्ता, प्रज्ञा प्रवाह के श्री दीपक ष्षर्मा, अधिवक्ता परिषद के श्री बी के संाघी साहित्य अकादमी के निदेषक डाॅ देवेन्द्र दीपक,, निराला सृजन पीठ के श्री रामेष्वर मिश्र पंकज सहित अनेक संगठनों के कार्यकर्ता और समाज के वरिष्ठ लोग उपस्थित थे।
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